महाराष्ट्र-कर्नाटक के बाद MP में भी हुई लाखों की ‘वोट चोरी’, EC ने 27 सीटों पर अचानक से बदली…
कांग्रेस के द्वारा आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के द्वारा MP के 2023 के विधानसभा चुनावों में भी लाखों वोट की गड़बड़ी की है। जहां कांग्रसे कम अंतर से हारी वहां पहले से ही वोट बढ़ा दिए गए थे।
- Written By: सौरभ शर्मा
कांग्रेस नेता व म.प्र. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
MP Assembly Voter List Irregularities: राहुल गांधी व कांग्रेस के द्वारा चुनावों में ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बाद अब मध्य प्रदेश की राजनीति भी गरमाई है। यहां पर भी नेताप्रतिपक्ष उमंग सिंघार के द्वारा राज्य में हुए 2023 के विधानसभा चुनावों में वोट चोरी के आरोप लगाए गए है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान 27 से ज्यादा सीटों पर वोटों की चोरी हुई है।
उनका कहना है कि यह सब भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अनैतिक लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। सिंघार का दावा है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं और इससे कांग्रेस के कई उम्मीदवार बेहद कम अंतर से हार गए।
चुनाव आयोग की मिलीभगत से केंद्र और राज्यों में सरकार बनी है। – वोट चोरी के माध्यम से फर्जी जनादेश लेकर मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाई।
– चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने में भूमिका निभाई।
– मतदाता सूचियाँ देने में चुनाव आयोग गड़बड़ी करता है।
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औसतन हर दिन 26 हजार नए मतदाताओं को जोड़ा गया
चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखते हुए कांग्रेस नेता ने बताया कि 5 जनवरी से 2 अगस्त 2023 के बीच मतदाताओं की संख्या में करीब 4.64 लाख की वृद्धि हुई। लेकिन सिर्फ दो महीनों यानी 2 अगस्त से 4 अक्टूबर के बीच यह बढ़ोतरी अचानक 16.05 लाख तक पहुंच गई। इसका मतलब है कि हर दिन औसतन 26 हजार नए मतदाता जुड़े। सिंघार के मुताबिक, यही असामान्य बढ़ोतरी उन सीटों पर कांग्रेस की हार का कारण बनी, जहां अंतर बेहद कम था।
ऐसे जीती भाजपा MP के चुनाव! – 05 जनवरी – 02 अगस्त (7 महीने) के दौरान मतदाताओं में लगभग 4.64 लाख की वृद्धि दर्ज हुई।
– 02 अगस्त – 04 अक्टूबर (2 महीने) में 16.05 लाख मतदाताओं की वृद्धि
– यानी प्रतिदिन 26,000 मतदाता जोड़े जा रहे थे
– चुनावी साल 2023 में मध्य प्रदेश में 34+ लाख… pic.twitter.com/Pm4xZO7ll0 — Umang Singhar (@UmangSinghar) August 19, 2025
मतदाता सूची पर उठाए गंभीर सवाल
उमंग सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग ने 2 दिसंबर 2022 को आदेश जारी कर 8.51 लाख फर्जी और डुप्लिकेट मतदाता नाम हटाने को कहा था। लेकिन किसी भी जिला अधिकारी ने इसका विलोपन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। सिंघार ने कहा कि जब तक अंतिम मतदाता सूची पर सभी राजनीतिक दलों के हस्ताक्षर नहीं होते और पारदर्शिता नहीं लाई जाती, तब तक निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े होते रहेंगे।
कांग्रेस की मांग और आयोग से अपील
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि चुनाव आयोग मतदाताओं का पूरा डेटा मशीन-पठनीय प्रारूप में जारी करे ताकि स्वतंत्र जांच हो सके। उन्होंने कहा कि आयोग केवल पीडीएफ इमेज जारी करता है, जबकि CSV फाइल फॉर्मेट उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों को सूची की सही जांच करने में मदद मिलेगी। सिंघार ने यह भी जोड़ा कि राहुल गांधी द्वारा देशभर में वोट चोरी के मुद्दे को उठाने के बाद अब यह साफ है कि मध्य प्रदेश भी इस सुनियोजित चुनावी षड्यंत्र का शिकार बना है।
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गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 163 सीटें जीतकर सरकार बनाई, जबकि कांग्रेस को 66 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। अब कांग्रेस इस मामले को बड़ा मुद्दा बनाकर जनता और चुनाव आयोग के सामने रखने की तैयारी में है।
