लाल आतंक का काउंटडाउन शुरू! 31 मार्च तक नक्सल मुक्त होगा भारत? 30 मार्च को संसद में होगी चर्चा
Anti-Naxal Policy: लोकसभा में 30 मार्च को नक्सलवाद के खात्मे पर चर्चा होगी। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल मुक्त करना है, जिसमें बस्तर और ओडिशा में मिली सफलताएं अहम हैं।
- Written By: अर्पित शुक्ला
अमित शाह (Image- Social Media)
Naxalism Free India: देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों पर 30 मार्च को लोकसभा में अहम चर्चा होने वाली है। कार्यसूची के मुताबिक, इस मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा नियम 193 के तहत शुरू की जाएगी, जिसकी पहल शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे करेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कई बार साफ कर चुके हैं कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना है। इसी दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं, जिसमें सुरक्षा अभियानों के साथ पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल करने पर खास जोर दिया जा रहा है।
खत्म हो रहा नक्सलवाद
पिछले एक साल में नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय सफलता मिली है। कई बड़े माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है। हाल ही में ओडिशा में कुख्यात माओवादी नेता सुकृ समेत चार अन्य ने 25 मार्च को पुलिस के सामने सरेंडर किया। एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजीव पांडा के अनुसार, इन पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम था और इन्होंने पांच हथियार भी जमा कराए, जिनमें AK-47 और INSAS राइफल शामिल हैं। कंधमाल जिले में अब माओवादियों की संख्या घटकर 8-9 तक रह गई है।
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इसी तरह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में भी बड़ी सफलता मिली है। दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य पप्पा राव सहित 17 माओवादी कैडर ने 17 मार्च को आत्मसमर्पण किया। बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहली बार इस क्षेत्र में नक्सली संगठन नेतृत्वविहीन होता दिख रहा है।
क्या है नियम 193?
लोकसभा में नियम 193 के तहत किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर बिना औपचारिक प्रस्ताव के चर्चा की जाती है। इस नियम के अंतर्गत चर्चा के बाद मतदान नहीं होता। संबंधित सदस्य संक्षिप्त बयान देता है और अन्य सदस्य भी अध्यक्ष की अनुमति से चर्चा में भाग लेते हैं।
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अब 30 मार्च को होने वाली इस चर्चा में सरकार अपने अब तक के प्रयासों और उपलब्धियों का ब्यौरा पेश करेगी, साथ ही आगे की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ पुनर्वास और सामाजिक समावेशन की नीति ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है।
