आज पटना में उतरेगी महिला ब्रिगेड! सम्राट चौधरी ने बनाया नया प्लान, जनता के बीच विपक्ष को घेरने की तैयारी
Gandhi Maidan Protest: महिला आरक्षण बिल गिरने पर बिहार में एनडीए का आक्रोश। पटना के कारगिल चौक पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में प्रदर्शन, विपक्ष के 'महिला विरोधी' रवैये के खिलाफ उठेंगे सवाल।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सांकेतिक तस्वीर (Image- Social Media)
Patna Gandhi Maidan Protest News: महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने कांग्रेस, राजद और समाजवादी पार्टी समेत पूरे विपक्ष को घेरने की रणनीति तेज कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार को गांधी मैदान के कारगिल चौक पर एनडीए की महिला कार्यकर्ताओं द्वारा आक्रोश प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता महिलाओं को संबोधित करेंगे।
रविवार शाम को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गांधी मैदान और कारगिल चौक पर चल रही तैयारियों का निरीक्षण किया। संजय सरावगी ने बताया कि बड़ी संख्या में महिलाएं गांधी मैदान में जुटेंगी और वहां से मार्च करते हुए कारगिल चौक तक जाएंगी।
आम महिलाएं भी होंगी शामिल
उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन में प्रदेश के सभी जिलों से एनडीए की महिला कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम महिलाएं भी शामिल होंगी और महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने के लिए विपक्ष से जवाब मांगेंगी।
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इस अवसर के लिए एक भव्य मंच भी तैयार किया गया है। सरावगी ने कहा कि लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित न होने से बिहार की महिलाओं में निराशा है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रही हैं।
महिलाएं विपक्षी दलों से सवाल करेंगी
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में महिलाएं विपक्षी दलों से सवाल करेंगी कि जब उनके परिवार की महिलाएं सांसद बन सकती हैं, तो गांव और आम पृष्ठभूमि की महिलाओं को यह अवसर क्यों नहीं दिया गया।
रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से विपक्ष का महिला विरोधी रवैया सामने आया है। उनके अनुसार, यदि यह विधेयक पारित हो जाता तो संसद में महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ सकती थी।
यह भी पढ़ें- विपक्ष ने महिलाओं को हराया, अंजाम भुगतना होगा…कैबिनेट बैठक में बोले PM मोदी, महिला आरक्षण पर दिया नया टास्क
गौरतलब है कि महिला आरक्षण से जुड़ा यह विधेयक लोक सभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। सरकार का कहना है कि यह संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।
