लोकसभा में टूटा मनमोहन का 21 साल पुराना रिकॉर्ड, PM के जवाब के बिना राष्ट्रपति का भाषण पारित
Lok Sabha proceedings: मौजूदा सत्र में लगातार व्यवधान न केवल विधायी एजेंडे को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि संसद की कार्यप्रणाली और संवाद की परंपरा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
- Written By: अर्पित शुक्ला
लोकसभा (Image- IANS)
Parliament Budget Session: लोकसभा के लिए गुरुवार, 5 फरवरी 2026 का दिन असामान्य रहा। प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा से पारित कर दिया गया। यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है, जब प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के बिना सदन ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को मंजूरी दी। इससे पहले जून 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हंगामे के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जारी बहस में हिस्सा नहीं ले सके थे और उनकी स्पीच के बिना ही प्रस्ताव पारित हुआ था।
बजट सत्र के दौरान संसद में जारी गतिरोध के बीच गुरुवार को लोकसभा ने संयुक्त सत्र में दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह संसदीय परंपरा से हटकर उठाया गया कदम माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब अहम माना जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार, 4 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के चलते कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। हालात को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी थी। गुरुवार को स्पीकर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसे विपक्षी हंगामे के बीच ही पारित कर दिया गया।
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लोकसभा में जारी रहा हंगामा
गुरुवार सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन को फिर स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया, जबकि वे 2020 के चीन गतिरोध से जुड़े मुद्दे पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देना चाहते थे।
सरकार और विपक्ष के बीच टकराव मंगलवार को उस वक्त और बढ़ गया था, जब कांग्रेस के आठ सांसदों को कथित अनुशासनहीनता के चलते बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके बाद से विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
21 साल पुरानी घटना की याद
संसदीय परंपरा के मुताबिक, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसी के जरिए सरकार अपनी प्राथमिकताओं और विपक्ष के सवालों का समग्र उत्तर देती है। ऐसे में प्रधानमंत्री के जवाब के बिना प्रस्ताव का पारित होना एक असाधारण घटना के रूप में देखा जा रहा है।
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इस पूरे घटनाक्रम ने 2004 की यादें भी ताजा कर दी हैं, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने का अवसर नहीं मिल पाया था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर 10 मार्च 2005 का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें डॉ. सिंह 10 जून 2004 की उस घटना का उल्लेख करते नजर आते हैं, जब उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया था।
