बंदरों की नसबंदी का फैसला! बढ़ती आबादी से तंग आकर राज्य ने उठाया बड़ा कदम

बंदरों के आतंक से कई राज्य सरकारें परेशान हैं। धर्मस्थलों वाले शहरों जैसे मथुरा-अयोध्या से लेकर प्रयागराज तक तो बंदरों की दहशत इस कदर है कि कई बार लोगों को जान तक गंवानी पड़ती है।
बंदरों की नसबंदी का फैसला! बढ़ती आबादी से तंग आकर राज्य ने उठाया बड़ा कदम
बंदर (Image- Social Media)
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यूपी-उत्तराखंड से लेकर बिहार तक जहां भी धार्मिक स्थल हैं, सबी शहरों में बंदरों का आतंक है, लेकिन कुछ दक्षिण भारत के राज्य भी बंदरों से परेशान हैं। बंदरों के आतंक से परेशान केरल में तो अब इसको लेकर बड़ा फैसला लिया गया है और उनकी नसबंदी की तैयारी की जा रही है। बंदरों की आबादी कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। केरल के वन विभाग ने केंद्र के वन-पर्यावरण मंत्रालय से इसके लिए इजाजत मांगी है।

घने पेड़ों वाले जंगलों से घिरे केरल राज्य में किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की फौज की वजह से उनकी फसलें तबाह हो रही हैं। नारियल से लेकर आम फसलों का नुकसान हो रहा है। बंदरों के डर से पर्यटक भी तमाम टूरिस्ट प्लेस तक जाने से घबरा रहे हैं। ऐसे में स्थानीय कारोबारी तथा दुकानदार भी इससे परेशान हैं।

जंगली सुअरों को मारा गया था

बता दें कि केरल सरकार इससे पहले जंगली सुअर, टाइगर हाथियों को भी मारने के लिए भारत सरकार से मंजूरी मांग चुकी है, क्योंकि यह जीव वन्यजीव अधिनियम के तहत संरक्षित सूची में आते हैं। केरल सरकार के मुताबिक, जंगली सुअरों के बाद बंदरों की आबादी बेकाबू हो चुकी है। लिहाजा अब मिशन बोनट मैक्यू चलाने का फैसला किया गया है।

बंदरों के लिए धार्मिक संवेदनशीलता

जंगली सुअरों को केरल में बड़े पैमाने पर मारने का निर्णय लिया गया था। लेकिन बंदरों के लिए धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए दूसरा विकल्प आजमाने की बात कही गई है। ऐसे में कुछ खास जगहों पर बंदरों की नसबंदी कराई। उन्हें कुछ वक्त तक निगरानी में रखा जाएगा और फिर उन्हें खुले में छोड़ा जाएगा। पर्यटकों द्वारा बंदरों को खुले में खाना खिलाने से रोकने के लिए इस पर जुर्माना लगाया जाएगा।

बता दें कि इस प्रजाति के बंदर आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र तथा तमिलनाडु-गुजरात जैसे राज्यों में मिलते हैं। हालांकि वन्यजीवों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन IUCN के अनुसार, कुछ इलाकों इन बंदरों की आबादी 65 फीसदी तक घटी है।

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