

Iran Violent Protests Death: ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। बीते 14 दिनों से बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। टाइम मैगजीन के हवाले से एक डॉक्टर ने दावा किया है कि तेहरान में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, क्योंकि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार 7 जनवरी के बाद से ईरान में विरोध प्रदर्शनों ने तेजी पकड़ ली है और ये पूरे देश में फैल गए हैं। राजधानी तेहरान से लेकर उत्तर-पश्चिमी ईरान तक जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। कई इलाकों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की तैनाती भी की गई है।
जैसे-जैसे विरोध बढ़ा, सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया, जिससे लोगों की सोशल मीडिया तक पहुंच सीमित हो गई। कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। मानवाधिकार उल्लंघनों पर नजर रखने वाले संगठनों, ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी, ईरान ह्यूमन राइट्स और हेंगाव ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने पहले मृतकों की संख्या करीब 40 बताई थी।
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से दबाव में है, जिसकी मुख्य वजह अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हैं, जो उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हैं। हालात को क्षेत्रीय तनावों ने और बिगाड़ दिया है, जिसमें पिछले साल जून में इजरायल के साथ हुई 12 दिनों की जंग भी शामिल है। ईरानी मुद्रा रियाल में भारी गिरावट आई है और 2025 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत लगभग आधी रह गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ दिसंबर महीने में महंगाई 42 प्रतिशत से ज्यादा रही। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ा है। शुरुआत में व्यापारी रियाल के पतन के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, लेकिन बाद में ये प्रदर्शन देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों और शहरों तक फैल गए।