केरल में जबरन पढ़ाई जाएगी मलयालम? भाषा विवाद में उलझे दो राज्य, कर्नाटक CM ने विजयन के खिलाफ खोला मोर्चा

सीएम सिद्धारमैया ने केरल के CM पिनाराई विजयन को एक चिट्ठी लिखकर सरकार के प्रस्तावित मलयालम भाषा बिल पर अपनी चिंता जताई। इस बिल में कन्नड़-मीडियम स्कूलों में मलयालम को अनिवार्य बनाने का प्रावधान है।
Will Malayalam be forcibly taught in Kerala? Two states embroiled in a language dispute; Karnataka CM opens a front against Vijayan
भाषा विवाद में उलझे दो राज्यों के CM (फोटो- सोशल मीडिया)
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Kerala Malayalam Compulsory Bill: दक्षिण भारत में भाषा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। केरल सरकार के एक फैसले ने पड़ोसी राज्य कर्नाटक की चिंता बढ़ा दी है। मामला मलयालम भाषा को अनिवार्य बनाने वाले एक प्रस्तावित बिल से जुड़ा है। इस पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कड़ा रुख अपनाते हुए केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने साफ कहा है कि कोई भी फैसला जबरन थोपने से पहले बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

दरअसल, केरल सरकार जो नया विधेयक लाने की तैयारी में है, उसके तहत कासरगोड जैसे सीमावर्ती जिलों के कन्नड़ मीडियम स्कूलों में भी मलयालम को पहली भाषा के तौर पर अनिवार्य किया जा सकता है। सिद्धारमैया का कहना है कि यह फैसला उन बच्चों पर बोझ डालेगा जो कन्नड़ में अपनी पढ़ाई करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह बिल बिना संशोधन के पास हुआ, तो कर्नाटक भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए विरोध करेगा।

चिट्ठी में छिपी बड़ी चेतावनी

सिद्धारमैया ने अपने पत्र में दोनों राज्यों के बीच गहरे सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों की याद दिलाई है। उन्होंने लिखा कि भारत की ताकत हमेशा से ही अनेकता में एकता रही है। अगर किसी एक भाषा को जबरदस्ती थोपा गया, तो यह बच्चों के साथ नाइंसाफी होगी। कासरगोड में बड़ी संख्या में लोग कन्नड़ में शिक्षा लेते हैं और यह परंपरा दशकों से चली आ रही है। उन्होंने केरल सरकार से आग्रह किया है कि बिल पर दोबारा विचार करें और आपसी बातचीत से हल निकालें। उनका मानना है कि समझदारी और संवैधानिक मूल्यों से ही एक ऐसा समाधान निकलेगा जो हर भाषा को फलने-फूलने का मौका देगा।

क्या कहता है संविधान और इतिहास

इस मुद्दे पर संविधान भी स्पष्ट है। अनुच्छेद 29 और 30 भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के संस्थान चलाने का हक देते हैं, वहीं अनुच्छेद 350A मातृभाषा में शिक्षा की वकालत करता है। अनुच्छेद 350B राज्यों को भाषाई हितों की रक्षा का काम सौंपता है। दूसरी ओर, मलयालम भाषा का अपना समृद्ध इतिहास है। यह पहाड़ों की भूमि की भाषा है और इसे 2013 में शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिला था। मजे की बात यह है कि मलयालम शब्द ही एक पैलिंड्रोम है, जिसे आगे या पीछे से पढ़ने पर एक जैसा ही लगता है। भारत में लगभग 4 करोड़ लोग इस भाषा को बोलते हैं।

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