पिनाराई के प्रस्ताव पर लगी मोदी की मुहर, अब 'केरलम' के नाम से जाना जाएगा केरल, किसे मिलेगा चुनावी फायदा?

Kerala News: मंगलवार को मोदी कैबिनेट ने कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी। इसमें केरल राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'केरलम' करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई है।
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Kerala Name Change: मंगलवार को 'सेवा तीर्थ' यानी नई पीएमओ बिल्डिंग में आयोजित पहली केंद्रीय कैबिनेट बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन्हीं अहम फैसलों में मोदी सरकार ने केरल राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'केरलम' करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को भी अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है।

आपको बता दें कि 24 जून, 2024 को केरल विधानसभा के भीतर सर्वसम्मति से एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से यह अपील की गई थी कि राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलम' कर दिया जाए। विधानसभा द्वारा भेजे गए उसी प्रस्ताव पर विचार करते हुए मंगलवार को संपन्न हुई केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक में इस ऐतिहासिक बदलाव को हरी झंडी दे दी गई है।

केरल कैबिनेट ने पास किया था प्रस्ताव

इससे पूर्व केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कुछ तकनीकी संशोधनों का सुझाव दिए जाने के कारण केरल विधानसभा को यह प्रस्ताव दूसरी बार पारित करना पड़ा था। सदन में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को पेश करते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट मांग की थी कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज सभी मान्यता प्राप्त भाषाओं में इस दक्षिणी राज्य का नाम 'केरल' के स्थान पर 'केरलम' के रूप में ही दर्ज किया जाना चाहिए।

नाम बदलने के लिए विजयन के तर्क

मुख्यमंत्री विजयन ने विधानसभा में प्रस्ताव रखते हुए स्पष्ट किया था कि स्थानीय मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से 'केरलम' ही पुकारा जाता है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के दौर से ही मलयालम भाषी समुदायों को मिलाकर एक अखंड 'केरलम' राज्य बनाने की पुरजोर मांग उठती रही है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी विशेष रूप से जोर दिया था कि वर्तमान में भारतीय संविधान की पहली अनुसूची के अंतर्गत राज्य का नाम केवल 'केरल' ही उल्लिखित है। केंद्र सरकार की तरफ से उठाया गया यह बड़ा और कूटनीतिक कदम आगामी अप्रैल-मई महीने में प्रस्तावित केरल विधानसभा चुनावों के ठीक पहले सामने आया है।

विजयन-बीजेपी के लिए अहम कदम

राज्य का नाम 'केरलम' करना वहां की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने वाले एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। आगामी चुनावों के मद्देनजर यह फैसला मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और भाजपा, दोनों के लिए काफी अहम है। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका सही फायदा कौन उठाता है।

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