

Keralam Shashi Tharoor Reaction: केरल का नाम बदलने पर सियासत तेज है, ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ट नेता शशि थरूर ने एक बार फिर चौंकाने वाला बयान दिया है, थरूर ने एक बार फिर से ऐसा बयान दिया है। जो कांग्रेस समेत विपक्ष की पार्टी लाइन से हटकर लग रहा है, इस बयान को तंज की तरह भी देखा जा रहा है।
दरअसल, जैसे ही केरल की सरकार ने केरल के नाम बदलने वाला फैसला दिया वैसे ही शशि थरूर के एक पोस्ट ने सबकी नजर खींच ली और फिर बहस भी शुरू हो गई, थरूर ने पोस्ट में लिखा की "यह सब अच्छा है इसमें कोई शक नहीं है,लेकिन इससे एक भाषाई सवाल उठता है। अगर केरलवासी “Keralamite” कहलाएंगे तो यह माइक्रोवेव की तरह सुनाई देता है और अगर “Keralamian” कहलाएंगे तो यह दुर्लभ पृथ्वी खनिज की तरह सुनाई देता है"।
किसी भी राज्य का नाम बदलने से पहले संविधान में संसोधन जरूरी होता है, पहले राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है, गृह मंत्रालय जांच करता है। इसके बाद खुफिया ब्यूरो, रेलवे और अन्य विभागों की एनओसी यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जरूरी होता है, इसके बाद दोनों सदनों में बिल पेश होता है और हर बिल तरह राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नाम को बदल दिया जाता है।
24 जून 2024 को दूसरे प्रस्ताव में यह रखा गया कि केरल राज्य का मलायम में नाम 'केरलम' है। आपको बता दें कि 1 नवंबर 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों को बनाया गया था, जिसे 'केरल पिरावी' यानी केरल स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में नाम 'केरल' लिखा है। इसलिए संविधान में बदलाव की ज़रूरत है।पहले प्रस्ताव में आठवीं अनुसूची की सभी भाषाओं में बदलाव की मांग थी, लेकिन बाद में पता चला कि सिर्फ़ पहली अनुसूची में ही बदलाव ज़रूरी है। इसलिए दूसरा प्रस्ताव पास किया गया।केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी पिछले महीने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समर्थन दिया था।