कर्नाटक में पावर बैलेंस का फॉर्मूला तैयार, 2 से 3 डिप्टी CM…राहुल गांधी बदलने जा रहे पूरा पावर स्ट्रक्चर
Karnataka CM Change: कांग्रेस का पूरा फोकस इस बात पर है कि नई सरकार में जातीय, क्षेत्रीय और गुटीय समीकरणों को कैसे संतुलित किया जाए, जिससे सिद्धारमैया और शिवकुमार खेमों के बीच टकराव की संभावना कम रहे।
- Written By: अर्पित शुक्ला
राहुल गांधी, डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया
Karnataka Congress Power Balance: कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने के साथ ही कांग्रेस पार्टी अब सत्ता और संगठन के बीच संतुलन साधने की कवायद में जुट गई है। राज्य में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन आलाकमान केवल चेहरा बदलने तक सीमित नहीं रहना चाहता। दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है और पार्टी का पूरा फोकस इस बात पर है कि नई सरकार में जातीय, क्षेत्रीय और गुटीय समीकरणों को कैसे संतुलित किया जाए, जिससे सिद्धारमैया और शिवकुमार खेमों के बीच टकराव की संभावना कम रहे।
खबरों के मुताबिक कांग्रेस हाईकमान ने मंगलवार को ही सिद्धारमैया को संकेत दे दिया था कि अब नेतृत्व परिवर्तन का वक्त आ गया है। हालांकि उस समय डीके शिवकुमार को औपचारिक तौर पर उत्तराधिकारी नहीं बनाया गया। कांग्रेस पहले नई कैबिनेट का ढांचा तैयार करना चाहती थी जिससे मंत्रियों के चयन में शिवकुमार को पूरी तरह खुली छूट न मिले और सिद्धारमैया खेमे की नाराजगी को रोका जा सके।
तीन डिप्टी सीएम बनाए जाने का फॉर्मूला
कांग्रेस पार्टी इसी रणनीति के तहत अब कर्नाटक में दो से तीन डिप्टी सीएम बनाए जाने का फॉर्मूला तैयार कर रही है। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि एक डिप्टी सीएम लिंगायत समुदाय से और दूसरा दलित समुदाय से हो सकता है। शिवकुमार खुद वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, इसलिए कांग्रेस पार्टी सामाजिक संतुलन का व्यापक संदेश देना चाहती है।
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कौन बनेगा उपमुख्यमंत्री?
कांग्रेस में लिंगायत चेहरे के तौर पर एमबी पाटिल सबसे मजबूत दावेदार द्ख रहे हैं। सिद्धारमैया के करीबी नेता माने जाने वाले पाटिल को लेकर ये भी चर्चा है कि अगर वो सरकार में शामिल नहीं होते हैं तो उनको प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं पूर्व प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा गृह मंत्री जी परमेश्वर दलित चेहरे के तौर पर डिप्टी सीएम पद की दौड़ में हैं।
खबरों के अनुसार सिद्धारमैया अपने बेटे यतिंद्र सिद्धारमैया को भी सरकार में बड़ी भूमिका दिलाने का प्रयास कर सकते हैं। अगर उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जाता है तो उपमुख्यमंत्रियों की संख्या दो या तीन तक पहुंच सकती है। कांग्रेस आलाकमान भी इसके विरोध में नहीं दिख रहा क्योंकि इससे सिद्धारमैया खेमे को साधने और नई सरकार को स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है।
संगठन में भी होगा बड़ा बदलाव
नई सरकार गठन के साथ ही संगठन में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। बेलगावी से आने वाले वरिष्ठ एसटी नेता सतीश जारकीहोली को नया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा चल रही है। डीके शिवकुमार 2020 से प्रदेश अध्यक्ष के पद पर हैं और मुख्यमंत्री बनने के बाद संगठन की जिम्मेदारी किसी नए चेहरे को सौंपी जा सकती है। जारकीहोली को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर नियुक्ति उत्तर कर्नाटक और अनुसूचित जनजाति समुदाय को मजबूत प्रतिनिधित्व देने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
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क्या करना चाहते हैं राहुल गांधी?
खबरों के मुताबिक, राहुल गांधी नई कैबिनेट में अहिंदा वर्गों की मजबूत भागीदारी चाहते हैं, जिनपर सिद्धारमैया की मजबूत पकड़ मानी जाती है। अहिंदा यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों का वो सामाजिक गठजोड़, जिसे सिद्धारमैया ने सालों में मजबूत किया है। कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि नेतृत्व परिवर्तन से ये सामाजिक समीकरण कमजोर पड़े और पार्टी को नुकसान हो।
