Karnataka: SIR अभियान पर भाजपा का बड़ा हमला, मतदाता सूची में बांग्लादेशी नागरिकों के नाम जोड़ रही कांग्रेस
BJP Karnataka: कर्नाटक में SIR अभियान को लेकर सियासी घमासान मचा है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर वोट बैंक के लिए मतदाता सूची में अवैध रूप से बांग्लादेशी नागरिकों के नाम जोड़ने की साजिश का आरोप लगाया है।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
भाजपा का पार्टी झण्डा (सोर्स- सोशल मीडिया)
BJP Karnataka Voter List Controversy: कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मतदाता सूची में कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों के नाम जोड़ने की साजिश रची जा रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करने के बजाय सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक स्थलों के बाहर मतदाता पंजीकरण फॉर्म वितरित कर रहे हैं।
भाजपा का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित है और इसके जरिए अवैध रूप से मतदाता सूची का विस्तार किया जा रहा है। पार्टी ने इस मामले की शिकायत केंद्रीय निर्वाचन आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से करने की घोषणा की है। साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग भी की है। भाजपा ने राज्य सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि SIR अभियान केवल भारतीय नागरिकों के लिए है और इसकी निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
SIR अभियान पर भाजपा का बड़ा आरोप
बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर सत्यापन करने के बजाय सड़कों पर बैठकर गणना फॉर्म (एन्यूमरेशन फॉर्म) बांट रहे हैं। उन्होंने इसे बांग्लादेशी नागरिकों को मतदाता बनाने की साजिश बताया। अशोक ने कहा, “निर्वाचन आयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है और यही केंद्र सरकार की भी मंशा है। लेकिन कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक को ‘बांग्ला’ लोगों के लिए स्वर्ग बना दिया है।”
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BLO की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में, विशेषकर बेंगलुरु, मडिकेरी और चिक्कमगलुरु जिलों में, लगभग 20 लाख “बांग्ला” निवासी हैं और उनके नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं थे। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि घर-घर सत्यापन करने के बजाय हज भवनों और मस्जिदों के बाहर खुलेआम मतदाता पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है।
आर. अशोक ने कहा, “बीएलओ का काम हर घर जाकर फॉर्म देना, विवरण का सत्यापन करना और आवेदन एकत्र करना है। लेकिन वे सड़कों पर बैठकर ऐसे फॉर्म बांट रहे हैं जैसे जनता को मुफ्त भोजन वितरित किया जा रहा हो। यह सब वोट बैंक की राजनीति के लिए बांग्लादेशी मूल के लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है।”
अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग
अशोक ने विशेष रूप से महादेवपुरा और ब्यातरायणपुरा क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां मस्जिदों के बाहर समूह बनाकर एसआईआर की प्रक्रिया चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय निर्वाचन आयोग और कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से करेंगे। अशोक ने मांग की, “ऐसी गतिविधियों की अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।”
कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि येलहंका के एक क्षेत्र में वर्ष 2002 की मतदाता सूची का रिकॉर्ड अब तक ऑनलाइन अपलोड नहीं किया गया है और कुछ खास समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। भाजपा नेता ने कांग्रेस पर एसआईआर को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर पार्टी सार्वजनिक रूप से इस अभियान का विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों से सरकारी गारंटी योजनाओं का लाभ लेने के लिए एसआईआर के तहत पंजीकरण कराने को कह रही है। उन्होंने कहा कि एसआईआर केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होता है।
सूखे और जल संकट पर भी सरकार को घेरा
किसानों को पानी की कमी के बीच फसल बोने को लेकर मुख्यमंत्री की कथित सलाह पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक ने कहा कि किसानों को ऐसी सलाह की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कहा यदि सरकार में साहस है तो उसे कर्नाटक के किसानों को सलाह देने के बजाय तमिलनाडु सरकार से खेती नहीं करने के लिए कहना चाहिए था।
उन्होंने आरोप लगाया कि मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना का तमिलनाडु द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने उसके खिलाफ कोई बयान नहीं दिया और राज्य से तमिलनाडु को पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना के लिए बजट में 10 रुपये तक का प्रावधान नहीं किया गया है।
22 जलाशयों में आया जलसंकट
अशोक ने दावा किया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार राज्य के 22 जलाशयों में जल भंडारण में भारी गिरावट आई है। उनके अनुसार, पिछले वर्ष इसी अवधि में जलाशयों में 335.292 टीएमसी पानी था, जबकि इस समय यह घटकर केवल 66.099 टीएमसी रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अलमट्टी, तुंगभद्रा, हिडकल और भीमा जैसे प्रमुख जलाशयों में भी गंभीर जल संकट है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार किसानों को खेती न करने की सलाह देने के बजाय राहत पैकेज की घोषणा करे।
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राज्य में सूखा टास्क फोर्स गठीत किया जाए
भाजपा नेता ने सरकार से फसल नुकसान के मुआवजे के लिए तत्काल 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करने, सूखा टास्क फोर्स गठित करने और पशुधन की सुरक्षा के लिए गोशालाएं स्थापित करने की मांग की। अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) और बेंगलुरु महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीएमआरडीए) जैसे अधिक राजस्व वाले विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि अन्य विभाग मंत्रियों को सौंप दिए गए हैं।
