

नई दिल्ली: बीते कल यानी बुधवार को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार वितरित किए गए। इस दौरान एक शख्स ने सबका ध्यान आकर्षित किया, जो नंगे पैर, गले में रुद्राक्ष की माल डाले हुए और तन पर सूती धोती लपेटे हुए 'महामहिम' के दरबार में पहुंचा था। ब्राजील के इस नागरिक को 'पद्मश्री' से भी नवाजा गया।
ब्राजील के वेदांत आचार्य जोनास मसेट्टी, जिन्हें 'विश्वनाथ' के नाम से भी जाना जाता है, को भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार भारतीय परंपरा और संस्कृति के प्रति समर्पण और वैश्विक स्तर पर इसके प्रचार-प्रसार के लिए दिया गया है।
जोनास मसेट्टी का जन्म ब्राजील में हुआ था। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और शेयर बाजार में काम किया। हालांकि, जीवनशैली से संतुष्ट न होने पर उन्होंने आध्यात्म की ओर रुख किया। भारत आकर उन्होंने वेदांत और योग का अध्ययन किया और आचार्य दयानंद सरस्वती के आश्रम में वेदांत की शिक्षा प्राप्त की।
भारत में वेदांत और दर्शन की शिक्षा प्राप्त करने के बाद जोनास ने ब्राजील के पेट्रोपोलिस में 'विश्व विद्या' की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से वह न केवल ब्राजील, बल्कि अन्य देशों में वेदांत, योग, संस्कृत, गीता और रामायण का प्रचार-प्रसार करते हैं। उनकी शिक्षाओं से अब तक डेढ़ लाख से अधिक छात्र प्रभावित हो चुके हैं।
भारत सरकार ने जोनास मैसेट्टी को उनके योगदान के लिए 'पद्म श्री' पुरस्कार से सम्मानित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में जोनास की तारीफ करते हुए उन्हें 'भारत का सांस्कृतिक राजदूत' कहा था।
पद्म श्री पुरस्कार मिलने के बाद जोनास ने कहा कि पद्म श्री उनके लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद है। यह पुरस्कार युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित करने में मदद करेगा। आपको बता दें कि जोनास मैसेट्टी का जीवन भारतीय संस्कृति के प्रति उनके प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।
पद्म श्री पुरस्कार भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है, जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। ये पुरस्कार कला, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, खेल, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक जीवन और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिए जाते हैं।