यह बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी है…जाति जनगणना पर जयराम रमेश का सरकार पर सीधा हमला, लगाए बड़े आरोप
Jairam Ramesh: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण और जाति जनगणना के नाम पर धोखाधड़ी हो रही। जयराम रमेश ने देरी के तर्कों को भी गुमराह करने वाला बताया।
- Written By: सजल रघुवंशी
जयराम रमेश (सोर्स- सोशल मीडिया)
Congress Allegations On BJP: संसद के आगामी सत्र से पहले सियासी माहौल एक बार फिर गरमा गया है। कांग्रेस ने रविवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जाति जनगणना के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है।
कांग्रेस का दावा है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन के जरिए देश को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने इसे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का हिस्सा बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
जयराम रमेश ने लगाए आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार अनुच्छेद 334-ए में संशोधन कर यह तर्क दे रही है कि जाति जनगणना के परिणाम आने में सालो लगेंगे, जबकि हकीकत इससे अलग है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने छह महीने से भी कम समय में व्यापक जाति सर्वेक्षण पूरा कर लिया था। रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है और जानबूझकर प्रक्रिया में देरी दिखाकर महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को टालना चाहती है।
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It is clear that the Modi Govt wants to put the caste census in cold storage. On July 20 2021, it answered a question in the Lok Sabha saying that the “Govt of India decided as a matter of policy NOT to enumerate caste-wise population other than SCs and STs in Census.” On Sept… pic.twitter.com/dHxRQEn2rc — Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 12, 2026
पुराने बयानों का दिया हवाला
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार के पुराने बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई 2021 को लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट किया था कि अनुसूचित जाति और जनजाति को छोड़कर अन्य जातियों की जनगणना न करने का नीतिगत निर्णय लिया गया है। इसके बाद 21 सितंबर 2021 को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर भी यही रुख दोहराया था। रमेश के अनुसार, 28 अप्रैल 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाति जनगणना की मांग उठाने पर कांग्रेस पर अर्बन नक्सल मानसिकता का आरोप लगाया था। हालांकि, 30 अप्रैल 2025 को सरकार ने अचानक घोषणा की कि आगामी जनगणना में जाति जनगणना भी शामिल होगी, जिसे कांग्रेस ने यू-टर्न बताया है।
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2027 तक डेटा संभव, फिर भी देरी का तर्क क्यों?
कांग्रेस का कहना है कि 30 मार्च 2026 को जनगणना आयुक्त ने खुद बताया कि डिजिटल प्रक्रिया के कारण 2027 में ही अधिकांश आंकड़े उपलब्ध हो जाएंगे। इसके बावजूद सरकार अब यह कह रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में कई साल लग सकते हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह विरोधाभास सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। पार्टी का कहना है कि महिला आरक्षण और जाति जनगणना जैसे अहम मुद्दों पर सरकार स्पष्टता के बजाय भ्रम पैदा कर रही है। संसद के तीन दिवसीय सत्र से पहले कांग्रेस के इन आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर सरकार क्या जवाब देती है और आने वाले सत्र में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
