कई मिसाइल डिफेंस सिस्टम के बारे में भारत कर रहा विचार (फोटो-सोशल मीडिया)
India Strengthening Air Defense: मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और लगातार होते मिसाइल व ड्रोन हमलों ने दुनिया भर के देशों को अपनी हवाई सुरक्षा पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी कड़ी में भारत अपनी हवाई रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। 3 मार्च 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, भारत न केवल रूस से अपने सबसे घातक ‘सुदर्शन’ (S-400) सिस्टम की संख्या बढ़ा रहा है, बल्कि फ्रांस और इजरायल से भी अत्याधुनिक मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहा है।
भारत ने लंबी दूरी की हवाई रक्षा को दोगुना करने के उद्देश्य से रूस से S-400 सुदर्शन एयर डिफेंस सिस्टम की पांच और स्क्वाड्रन खरीदने की योजना बनाई है। गौरतलब है कि 2018 में हुए समझौते के तहत पांच स्क्वाड्रन में से तीन डिलीवर हो चुके हैं और बाकी दो 2026-27 तक आने की उम्मीद है। अब अतिरिक्त पांच स्क्वॉड्रन के साथ भारत पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर अपनी पैठ मजबूत करेगा। यह सिस्टम 400 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के विमान, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने बढ़ाया भरोसा भारत का S-400 पर भरोसा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद और बढ़ गया है। मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान, इस सिस्टम ने कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों को मार गिराया था। जहाँ चीन के HQ-9 जैसे सिस्टम ईरान-इजरायल संघर्ष में विफल साबित हो रहे हैं, वहीं S-400 की सटीकता ने इसे भारत के लिए ‘गेम-चेंजर’ बना दिया है।
भारतीय वायु सेना और नौसेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए फ्रांस से SCALP लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें बड़ी संख्या में खरीदने की तैयारी में है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 300 मिलियन यूरो बताई जा रही है। इसके अतिरिक्त, राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 150 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली मेटियोर (Meteor) एयर-टू-एयर मिसाइलों का भी ऑर्डर दिया जा रहा है। हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इजरायल से बराक-8 (Barak-8) और रूस से ड्रोन-रोधी पैंटसिर (Pantsir) सिस्टम खरीदने पर भी विचार चल रहा है।
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भारत केवल विदेशी हथियारों पर निर्भर नहीं है, बल्कि एक मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है। इसमें स्वदेशी आकाश (Akash) और QR-SAM सिस्टम के साथ-साथ भविष्य के लिए रूस के S-500 सिस्टम की संभावना भी तलाशी जा रही है, जो हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता रखता है। ईरान संघर्ष से सीख लेते हुए भारत अब सस्ते ड्रोनों और मिसाइलों के खतरों से निपटने के लिए एक ऐसी ढाल बना रहा है जो शहरों, सैन्य ठिकानों और सीमाओं की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।