अपने ही बयान में फंसे नेपाली PM बालेन शाह! भारत के सख्त रुख के बाद बैकफुट पर काठमांडू? Video
India Nepal border dispute 2026: नेपाल पीएम के बयान के बाद नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष रवि लमिछाने अचानक दिल्ली पहुंचे। आखिर शाह के बयान पर अब भारत ने क्या बोला?
- Written By: तनमय बरनवाल
India-Nepal Border Dispute: भारत और पड़ोसी देश नेपाल के बीच सीमा विवाद इन दिनों काफी चर्चा में है। अब इसको लेकर पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी हुआ है, उसने दोनों ही देशों के कूटनीतिक रिश्तों में एक नया मोड़ ला दिया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक विवादित बयान के बाद काठमांडू में राजनीतिक भूचाल आ गया, लेकिन रुकिए अब संकेत मिल रहे हैं कि नेपाल टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत की मेज पर लौट रहा है। नेपाल पीएम के बयानबाजी के बीच इसी बीच नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष रवि लमिछाने का अचानक दिल्ली पहुंचे और इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह व विदेश मंत्री एस. जयशंकर से उनका मुलाकात करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिर बालेन शाह के उस बयान का सच क्या है जिसमें उन्होंने भारत और नेपाल दोनों तरफ से जमीन कब्जे की बात कही थी?इस वीडियो में हम गहराई से समझेंगे कि आखिर क्या है 1816 की सुगौली संधि का वो विवाद? क्यों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर दोनों देशों की व्याख्या अलग-अलग है? और रणनीतिक रूप से लिपुलेख दर्रा भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? भारत सरकार ने चीन या किसी तीसरे देश की मध्यस्थता को लेकर क्या कड़ा संदेश दिया है।
India-Nepal Border Dispute: भारत और पड़ोसी देश नेपाल के बीच सीमा विवाद इन दिनों काफी चर्चा में है। अब इसको लेकर पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी हुआ है, उसने दोनों ही देशों के कूटनीतिक रिश्तों में एक नया मोड़ ला दिया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक विवादित बयान के बाद काठमांडू में राजनीतिक भूचाल आ गया, लेकिन रुकिए अब संकेत मिल रहे हैं कि नेपाल टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत की मेज पर लौट रहा है। नेपाल पीएम के बयानबाजी के बीच इसी बीच नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष रवि लमिछाने का अचानक दिल्ली पहुंचे और इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह व विदेश मंत्री एस. जयशंकर से उनका मुलाकात करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिर बालेन शाह के उस बयान का सच क्या है जिसमें उन्होंने भारत और नेपाल दोनों तरफ से जमीन कब्जे की बात कही थी?इस वीडियो में हम गहराई से समझेंगे कि आखिर क्या है 1816 की सुगौली संधि का वो विवाद? क्यों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर दोनों देशों की व्याख्या अलग-अलग है? और रणनीतिक रूप से लिपुलेख दर्रा भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? भारत सरकार ने चीन या किसी तीसरे देश की मध्यस्थता को लेकर क्या कड़ा संदेश दिया है।
