मौसम विभाग को मिली AI की पावर, अब चार हफ्ते पहले पता चल जाएगा मानसून का हाल, देश में बदलेगी खेती की सूरत
India Weather Technology: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने AI आधारित नई प्रणाली शुरू की है, जो 4 हफ्ते पहले मानसून और यूपी में 1 किमी के दायरे तक सटीक बारिश की जानकारी देने में सक्षम है।
- Written By: अक्षय साहू
सांकेतिक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
IMD New AI Weather Forecasting System: भारत मौसम विभाग (IMD) जल्द ही देश में मौसम पूर्वानुमान को लेकर एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है। जिससे अब लोगों की मौसम का हाल जानने के लिए आसमान की ओर नहीं देखना पड़ेगा। IMD जल्द ही मौसम की जानकारी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नई प्रणाली शुरू करने जा रही है, जो चार हफ्ते पहले ही जिलावार मानसून की जानकारी दे सकेगी।
भारतीय मौसम विभाग ने इसके अलावा उत्तर प्रदेश में एक किलोमीटर क्षेत्र तक बारिश की पूर्व-सूचनादेने वाली नई सेवा की भी शुरूआत कर दी है। जानकारी के मुताबिक,यह सेवा दस दिन पहले ही स्थानीय मौसम की जानकारी देगी।
खेती को और बेहतर बनाने की योजना
IMD अपनी नई सेवाओं के जरिए देश में खेती को और बेहतर योजना बनाने, शहरों के जिन इलाकों में जलभराव की समस्या है उनसे निपटने के साथ ड्रेनेज प्रबंधन संभालने और प्रशासन को आपदा से निपटने में मदद मिलेगी। जानकारी के मुताबिक, विभाग जल्द ही इस प्रकार की हाइपर-लोकल सेवाओं का विस्तार उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के में भी करेगी।
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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
मंगलवार (12 मई 2026) को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन दोनों प्रणालियों की शुरुआत की। इसमें पहली प्रणाली मानसून की प्रगति का AI आधार पर पूर्वानुमान उपलब्ध कराएगी। जबकि, दूसरी यूपी में उच्च स्थानिक रिजोल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान सेवा है। इन्हें IMD ने इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी पुणे और नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग के साथ मिलकर विकसित किया है।
AI से मिलेगी मानसून की जानकारी
मौसम विभाग ने बताया कि, AI आधारित मानसून प्रणाली अगले चार हफ्ते तक हर बुधवार को मानसून का पूर्वानुमान जारी करेगी। इस सिस्टम को फिलहाल 16 राज्यों और तीन हजार से अधिक उप-जिलों के लिए तैयार किया गया है। इससे इन इलाकों में खेती करने वाले किसानों को बुआई, सिंचाई, खाद प्रबंधन और फसल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेने में सहायता मिलेगी।
नई तकनीक से किसानों को मिलेगी मदद (IA जनरेटेड फोटो)
इसमें AI मॉडल, एक्सटेंडेड रेंज प्रोडक्शन सिस्टम (ERPS) और तकनीकों को एक साथ जोड़ा गया है। अभी तक लंबे समय के मौसम के अनुमान बड़े भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित रहते थे। अब इस नई तकनीक के माध्यम से जिला और उप-जिला लेवल तक की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
AI से पता चलेगा मानसून (AI जनरेटेड फोटो)
मौसम विभाग कहा कि, नई तकनीक के तहत मानसून का पूर्वानुमान लगाने के लिए स्वचालित वर्षामापी, डाप्लर रडार और उपग्रह से मिले डेटा का उपयोग करेगी। इसमें किसी जिले या शहर के किस इलाके में कब और कितनी बारिश होगी, इसका अधिक सटीक अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। विभाग ने कहा कि, यह हाइपर-लोकल सेवा सिर्फ खेती के लिए ही नहीं, बल्कि शहरों में जलभराव रोकने, ट्रैफिक संभालने, हवाई यातायात, बिजली सप्लाई, जलाशयों के संचालन और आपदा प्रबंधन में भी मदद करेगी। इससे प्रशासन को भारी बारिश या अचानक मौसम परिवर्तन होने पर स्थिति को संभालने में सहायता मिलेगी।
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देश में 10 साल पहले तक केवल 16-17 डाप्लर रडार थे, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है। मिशन मौसम के तहत 50 और रडार लगाए जाएंगे। पिछले दस सालों में खराब मौसम की भविष्यवाणी की सटीकता में लगभग 40% सुधार हुआ है। इसके अलावा चक्रवात की दिशा, ताकत और तट से टकराने के समय का अनुमान भी पहले से ज्यादा भरोसेमंद हुआ है।
