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Explainer: शिप रीसाइक्लिंग का किंग बना भारत, जानिए कैसे समुद्र का कबाड़ बना देश के लिए ‘सोना’ जितना कीमती?
- Written By: अक्षय साहू
India Ship Breaking Yard: भारत पानी के जहाजों की रीसाइक्लिंग में दुनिया का नंबर वन देश बन गया है। वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 35.4 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

शिप रीसाइक्लिंग का किंग बना भारत (AI जनरेटेड फोटो)
India Becomes Ship Recycling Hub: भारत ने एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। देश पानी के जहाजों की रीसाइक्लिंग के मामले में दुनिया में टॉप पर पहुंच गया है। जहाजों की रीसाइक्लिंग को लेकर भारत की हिस्सेदारी 35.4 फीसदी तक पहुंच गई है, जो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। देश ने साल साल 2025 में 29.9 लाख ग्रास टन एवं साल 2024 में 18.6 लाख ग्रास टन री-साइकिल किया था।
भारत की इस बड़ी उपलब्धि के बहाने आपको बताते हैं कि जहाजों की रीसाइक्लिंग क्या है? इसे कैसे किया जाता है? और यह उपलब्धि देश के लिए कितनी महत्वपूर्ण है? भारत के अलावा वो कौन से देश हैं जो जहाजों की रीसाइक्लिंग करते हैं? रीसाइक्लिंग के क्या फायदे नुकसान हैं?
क्या होती है जहाज रीसाइक्लिंग?
जहाज रीसाइक्लिंग को समान्य शब्दों में कहे तो एक विशाल जहाज को सुरक्षित तरीके से खोलना और उसके पुर्जों को काटकर बाजार में बेचने को रीसाइक्लिंग कहा जाता है। इसमें जहाज के लोहे को काटकर उसे पिघलाया जाता है। इसके अलावा जहाज में मौजूद फर्नीचर, बिजली के उपकरणों, इंजन और अन्य फिटिंग को काटकर अलग कर दिया जाता है। यह एक मुश्किल और खतरनाक काम है। क्योंकि इसमें पर्यावरण और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखना पड़ता है।
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कब की जाती है रीसाइक्लिंग?
जब पानी पर चलने वाला कोई जहाज अपनी सर्विस के 25 से 30 साल पूरे कर लेता है और उसका संचालन असुरक्षित और खर्चीला हो जाता है। तब शिपिंग कंपनियां ऐसे जहाजों को रिटायर कर देती हैं। ऐसे में इन पुराने जहाजों के लोहे और दूसरी कीमती सामानों को फिर से उपयोग में लाने की प्रक्रिया को जहाज रीसाइक्लिंग या शिप ब्रेकिंग कहा जाता है।
कितने चरणों में होती है रीसाइक्लिंग
कई चरणों में होती है शिप रीसाइक्लिंग (AI जनरेटेड फोटो)
एक जहाज को रीसाइक्लिंग के दौरान कई चरणों से होकर गुजरना पड़ता है।
- किनारे लाना: सबसे पहले जहाज को समुद्र से खींचकर किनारे पर लाया जाता है। ताकि वह रेत में स्थिर हो जाए।
- खतरनाक पदार्थों को बाहर निकालना: दूसरे चरण में जहाज के अंदर मौजूद तेल, डीजल, खतरनाक रसायनों को बाहर निकाला जाता है। यह पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
- जहाज की कटाई: इसके बाद प्रशिक्षित मजदूरों द्वारा गैस कटर की मदद से जहाज के ऊपरी हिस्से को काटकर अलग करने का काम किया जाता है। इसके बाद पूरे जहाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया जाता है।
- सामग्री का वर्गीकरण: इसके बाद जहाज से निकले लोहे को स्टील मिलों में भेज दिया जाता है। जबकि बाकी के सामान और फर्नीचर को मार्केट में बेच दिया जाता है।
भारत कैसे बना रीसाइक्लिंग का किंग?
भारत के शिप रीसाइक्लिंग का केंद्र बनने के प्रमुख कारण (AI जनरेटेड फोटो)
भारत लंबे समय से जहाजों की रीसाइक्लिंग का काम बड़े स्तर पर करता आ रहा है। भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा शिप ब्रेकिंग यार्ड भी है, जो गुजरात के अलंग में स्थित है।
- अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड: गुजरात का अलंग दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग केंद्र माना जाता है। यहां 150 से अधिक सक्रिय यार्ड संचालित हैं।
- अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन: भारत ने हॉन्ग कॉन्ग कन्वेंशन के अनुरूप सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल रीसाइक्लिंग व्यवस्था विकसित की है। हाल ही में 115 यार्डों के आधुनिकीकरण पर 53.5 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
- कुशल और किफायती मजदूर:भारत के पास प्रशिक्षित और अपेक्षाकृत कम लागत वाला श्रमिक बल उपलब्ध है, जो इस उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देता है।
- स्टील की बढ़ती मांग: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और निर्माण गतिविधियों के कारण देश में स्टील की भारी मांग है। अनुमानतः जहाज रीसाइक्लिंग से मिलने वाला स्टील भारत की कुल स्टील आवश्यकता का लगभग 10 प्रतिशत पूरा करता है।
- मजबूत कानूनी ढांचा: शिप रीसाइक्लिंग अधिनियम, 2019 के लागू होने से उद्योग को कानूनी मजबूती मिली और विदेशी जहाज मालिकों का भरोसा बढ़ा।
पर्यावरण और सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
एक वक्त था जब शिप ब्रेकिंग को प्रदूषित और खतरनाक माना जाता था। लेकिन अब समय बदल गया है और अब ग्रीन शिप रीसाइक्लिंग पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत जहाज से निकलने वाले तेल और कचरे को सीधे समुद्र में नहीं गिराया जाता। मजदूरों को सभी जरूरी सुरक्षा किट दी जाती है और हर कदम पर जोखिम का आकलन किया जाता है।
जहाजों के रीसाइक्लिंग से केवल लोहा उद्योग को फायदा नहीं हो रहा, बल्कि यह इससे जुडे लाखों लोगों को रोजगार का अवसर प्रदान करता है। गुजरात के अलंग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों का घर इससे चल रहा है। साथ ही यह उद्योग देश की जीडीपी में भी करोड़ों डॉलर का योगदान देता है। इसके अलावा यह प्राकृतिक संसाधनों को बचाने का एक अच्छा तरीका भी है। क्योंकि यह जमीन से निकलने वाले लोहे की तुलना में कम खर्चीला और कम प्रदूषणयुक्त होता है।
जहाज रीसाइक्लिंग में दुनिया के टॉप 5 देश
वैश्विक स्तर पर जहाज रीसाइक्लिंग उद्योग का केंद्र मुख्य रूप से दक्षिण एशिया है। साल 2023-24 के उपलब्ध आंकड़ों और उद्योग रुझानों के अनुसार, जहाजों के रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, तुर्की और चीन शामिल हैं।
|
रैंक |
देश | अनुमानित वैश्विक हिस्सेदारी |
|
1 |
भारत |
30-35% |
|
2 |
बांग्लादेश |
25-28% |
|
3 |
पाकिस्तान |
15-18% |
|
4 |
तुर्की |
7-10% |
| 5 | चीन |
3-5% |
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
आने वाले सालों में उद्योग के सामने नई चुनौतियां होंगी
- इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन वाले जहाजों की रीसाइक्लिंग
- पर्यावरणीय मानकों को और सख्त बनाना
- आधुनिक तकनीकों का उपयोग
- श्रमिक सुरक्षा को और मजबूत करना
दूसरी ओर अवसर भी बड़े हैं। अनुमान है कि अगले 10 सालों में दुनिया भर में 16,000 से अधिक जहाज सेवा से बाहर होंगे। भारत की वर्तमान क्षमता 500-600 जहाजों के रीसाइक्लिंग की है और सरकार इसे और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
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जहाज रीसाइक्लिंग सर्कुलर इकॉनमी का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां पुराने संसाधनों को नए आर्थिक मूल्य में बदला जाता है। भारत का इस क्षेत्र में दुनिया में नंबर एक बनना सिर्फ औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समुद्री व्यापार, हरित अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सफलता दर्शाती है कि भारत वैश्विक समुद्री उद्योग में लगातार अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है और भविष्य में इस क्षेत्र का और भी बड़ा केंद्र बन सकता है।
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