सुपरकंप्यूटर की जंग में चीन ने मारी बाजी, US से छिना NO-1 का ताज; LineShine की रफ्तार देख दंग रह गई दुनिया

China LineShine Supercomputer: चीन के नए सुपरकंप्यूटर 'LineShine' ने अमेरिकी 'El Capitan' को पछाड़कर दुनिया के सबसे शक्तिशाली सिस्टम का खिताब जीत लिया है। एल कैपिटन अब दूसरे स्थान पर खिसक गया है।
China wins the supercomputer race, wresting the number-1 crown from the US; the world is stunned by the speed of 'LineShine'.
सांकेतिक एआई फोटो
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World's Fastest China LineShine Supercomputer: वैश्विक तकनीक और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के क्षेत्र में चीन ने एक बार फिर अपना परचम लहराया है। चीन के शेनझेन स्थित नए सुपरकंप्यूटर LineShine ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली कंप्यूटिंग सिस्टम का ताज अमेरिका से छीन लिया है। मंगलवार को जर्मनी के हैम्बर्ग में आयोजित 'ISC' कंप्यूटिंग सम्मेलन के दौरान जारी की गई 'TOP500' रैंकिंग में लाइनशाइन को नंबर-1 स्थान दिया गया है।

9 साल बाद चीन की शीर्ष पर वापसी

सुपरकंप्यूटिंग की दुनिया में यह चीन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। साल 2017 के बाद यह पहली बार है जब चीन का कोई सुपरकंप्यूटर इस वैश्विक सूची में शीर्ष पर पहुंचा है। लाइनशाइन ने अमेरिका के सबसे शक्तिशाली सिस्टम El Capitan  को कड़ी टक्कर देते हुए पीछे छोड़ दिया है। परीक्षणों के अनुसार, लाइनशाइन की कार्यक्षमता एल कैपिटन की तुलना में 20 प्रतिशत से भी अधिक तेज पाई गई है।

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से लैस

LineShine की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्वदेशी तकनीक है। जहां दुनिया भर के अधिकांश सुपरकंप्यूटर अमेरिकी माइक्रोप्रोसेसरों पर निर्भर हैं, वहीं चीन ने लाइनशाइन को पूरी तरह से अपने घरेलू डिजाइन किए गए प्रोसेसरों से तैयार किया है। बीजिंग की यह रणनीति उन्नत कंप्यूटिंग के क्षेत्र में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। टेनेसी यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध प्रोफेसर जैक डोंगारा ने हाल ही में शेनझेन क्लाउड कंप्यूटिंग सेंटर में इस मशीन का निरीक्षण किया और इसकी तकनीकी श्रेष्ठता की पुष्टि की है।

2.2 Exaflops दर्ज की गई गति

तकनीकी आंकड़ों की बात करें तो लाइनशाइन की निरंतर काम करने की गति 2.2 Exaflops दर्ज की गई है। एक्साफ्लॉप्स वह पैमाना है जो यह मापता है कि कोई सुपरकंप्यूटर एक सेकंड में कितनी अरबों-खरबों Calculations कर सकता है। लाइनशाइन की यह रफ्तार इसे किसी भी तरह के वैज्ञानिक शोध, मौसम विज्ञान और सामरिक डेटा विश्लेषण के लिए दुनिया का सबसे तड़गा कंप्यूटर बनाती है।

वैश्विक शक्ति संतुलन भले ही चीन ने नंबर-1 की कुर्सी हासिल कर ली है, लेकिन टॉप रैंकिंग में अमेरिका का प्रभाव अभी भी बना हुआ है। वर्तमान में दुनिया के शीर्ष 4 सुपरकंप्यूटरों में से 3 अभी भी अमेरिका के पास ही हैं, जिसमें एल कैपिटन अब दूसरे स्थान पर खिसक गया है। वहीं, यूरोप की ओर से जर्मनी का 'ज्यूपिटर बूस्टर' इस सूची में पांचवें स्थान पर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह नई उपलब्धि तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और तेज कर देगी।

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