Explainer: मनमोहन सरकार में खराब हुआ रिश्ता, मोदी ने बदली तस्वीर; आजादी से अब तक कैसा रहा भारत-इटली का संबंध?
India-Italy Relationship: विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इटली यूरोपीय संघ में भारत के सबसे बड़े बिजनेस पार्टनर में से एक है। दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 14 से 15 अरब यूरो पहुंच चुका है
- Written By: मनोज आर्या
जवाहर लाल नेहरू, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी, (सोर्स-AI)
India-Italy Relationship After Independence: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप के 5 देशों की अपनी यात्रा के आखिरी चरण में इटली पहुंचे हैं। मेजबान देश की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने गर्मजोशी के साथ रोम में पीएम मोदी का स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और इटली अब केवल मित्र राष्ट्र नहीं हैं, बल्कि रणनीतिक साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इटली के बीच संबंध अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। हाल के सालों में हमारे संबंध तेजी से बढ़े हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच अच्छी बॉन्डिंग को देखते हुए कई लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इससे पहले यानी की आजादी से लेकर अब तक भारत और इटली के बीच कैसा संबंध रहा है। आइए एक-एक कर सभी पहलुओं को इस एक्सप्लेनर के जरिए समझने की कोशिश करते हैं।
1. नेहरू के दौर में औपचारिक शुरुआत
भारत की आजादी के तुरंत बाद यानी की साल 1947 में भारत और इटली के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध शुरू हुए। 1948 में दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां अपने-अपने दूतावास स्थापित किए। इसके बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने साल 1953 और फिर 1955 में इटली की आधिकारिक यात्रा की थी। नेहरू के दौर में दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौतों की शुरुआत हुई। हालांकि, उस समय भारत ‘गुटनिरपेक्ष आंदोलन’ का नेतृत्व कर रहा था और इटली नाटो (NATO) का हिस्सा था, इसके बावजूद नेहरू और तत्कालीन इतालवी नेतृत्व ने आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया।
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तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में औपचारिक शुरुआत।
2. इंदिरा गांधी के कार्यकाल में नया मोड़
इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान भारत-इटली संबंधों में एक नया मोड़ आया, जो न केवल राजनीतिक था बल्कि व्यक्तिगत भी था। साल 1968 में इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी का विवाह इटली की नागरिक सोनिया माइनो (सोनिया गांधी) से हुआ। इस पारिवारिक जुड़ाव के कारण इटली की मीडिया और वहां के राजनीतिक हलकों में भारत को लेकर दिलचस्पी काफी बढ़ गई। इंदिरा गांधी के समय में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और व्यापार में तेजी आई। 1981 में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘भारत-इटली संयुक्त आयोग’ (Joint Commission for Economic Cooperation) का गठन किया गया, जो आज भी द्विपक्षीय व्यापार की रीढ़ है।
3. मनमोहन सिंह के दौर का ‘मरीन विवाद’
यूपीए (UPA) सरकार के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारत और इटली के रिश्ते इतिहास के सबसे अच्छे और सबसे बुरे, दोनों दौर से गुजरे। साल 2000 के दशक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 8 अरब डॉलर को पार कर गया। फिएट (Fiat) और पिआजियो (Piaggio) जैसी इटालियन कंपनियों ने भारत में अपना विस्तार किया।
हालांकि, फरवरी 2012 में केरल तट के पास इटालियन कमर्शियल जहाज ‘एनरिका लेक्सी’ पर सवार दो इटली नौसैनिकों ने दो भारतीय मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना ने दोनों देशों के बीच गंभीर राजनयिक संकट खड़ा कर दिया। इटली का तर्क था कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई, इसलिए भारत को केस चलाने का अधिकार नहीं है, जबकि भारत अपने नागरिकों की हत्या पर कड़ा रुख अपनाए हुए था। इस विवाद के कारण कई सालों तक दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत लगभग ठप रही।
मनमोहन सिंह के कार्यकाल में मरीन विवाद से रिश्तों में उतार-चढ़ाव।
4. मोदी के कार्यकाल में ‘रणनीतिक साझेदारी’
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद, भारत ने इस गतिरोध को तोड़ने की दिशा में काम किया। जुलाई 2020 में ‘permanent Court of Arbitration’ (PCA) के फैसले के बाद, इटली ने मृत भारतीय मछुआरों के परिवारों को₹10 करोड़ का मुआवजा दिया। इसके बाद जून 2021 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बंद कर दी, जिससे दोनों देशों के रिश्तों पर लगा सबसे बड़ा दाग साफ हो गया।
साल 2023 में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की भारत यात्रा के दौरान, दोनों देशों के संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर अपग्रेड किया गया। पीएम मोदी और पीएम मेलोनी के नेतृत्व में दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और क्लीन एनर्जी (Green Hydrogen) में सहयोग के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इटली अब भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस’ का भी सक्रिय हिस्सा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में रणनीतिक साझेदारी।
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इटली सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर
विदेश मंत्रालय (MEA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इटली यूरोपीय संघ (EU) में भारत के सबसे बड़े बिजनेस पार्टनर में से एक है। भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 14 से 15 अरब यूरो के बीच पहुंच चुका है। भारत से इटली मुख्य रूप से लोहा, स्टील, टेक्सटाइल और रसायन जैसे उत्पाद खरीदता है। वहीं, भारत मशीनरी और तकनीकी उपकरण इटली से इंपोर्ट करता है।
