पंजाब कांग्रेस के नेता
Punjab Congress: पंजाब कांग्रेस में जारी अंतर्कलह के बीच पार्टी नेतृत्व ने बृहस्पतिवार को राज्य के नेताओं को सख्त चेतावनी दी है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक बयानबाजी या किसी भी तरह की अनुशासनहीनता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ कर दिया गया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में किसी तरह के बदलाव का कोई सवाल नहीं है।
पार्टी नेतृत्व ने पंजाब कांग्रेस से जुड़े नेताओं के साथ करीब तीन घंटे तक विस्तृत चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास ‘10 राजाजी मार्ग’ पर हुई इस बैठक में खरगे के अलावा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी, महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
यह बैठक हाल ही में सामने आए एक वीडियो के बाद हुई, जिसमें चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी में दलितों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए सुना गया था। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई थी। हालांकि चन्नी का कहना है कि उन्होंने किसी खास जाति या समुदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की थी।
बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा, “खरगे जी और राहुल जी ने पंजाब के हर नेता की बात करीब तीन घंटे तक ध्यान से सुनी। नेताओं ने पंजाब कांग्रेस के भविष्य को लेकर अपने विचार रखे। यह चर्चा बेहद सकारात्मक और सार्थक रही।”
उन्होंने कहा, “पार्टी नेतृत्व ने आज बिल्कुल साफ निर्देश दिया है कि आंतरिक मुद्दों पर मीडिया या सोशल मीडिया में किसी भी तरह की बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी नेताओं ने सर्वसम्मति से नेतृत्व के फैसले का समर्थन किया है।”
प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की अटकलों पर वेणुगोपाल ने दो टूक कहा, “नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल ही नहीं है।” चन्नी द्वारा उठाए गए मुद्दे पर उन्होंने कहा, “कांग्रेस सभी समुदायों, खासकर एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के गरीब लोगों के प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है। यही पार्टी की सोच है और यही लाइन पूरे देश में अपनाई जा रही है, जो पंजाब में भी लागू है। लेकिन मीडिया या सोशल मीडिया के जरिए इस तरह की बातों को उठाने से संगठन को नुकसान पहुंचता है।”
उन्होंने दावा किया, “कांग्रेस पंजाब में एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी और जनता के समर्थन से जीत दर्ज करेगी।” बैठक के बाद नेताओं ने हाथ मिलाकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उम्मीदवार चयन, प्रचार और अन्य चुनावी मुद्दों पर निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा।
पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। इस दौरान भूपेश बघेल ने कहा, “आज वरिष्ठ नेताओं के साथ पंजाब को लेकर अहम बैठक हुई, जिसमें आने वाले समय की रणनीति पर चर्चा की गई। पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, इसलिए यहां की अहमियत और भी बढ़ जाती है।”
उन्होंने आगे कहा, “पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता की इच्छा है कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार बने। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि जनता की आवाज सुनें और उसी के अनुरूप काम करें। शीर्ष नेतृत्व ने अनुशासन को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं और पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
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खबरों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने चन्नी के बयान पर नाराजगी जताई और उन्हें भविष्य में इस तरह की टिप्पणियों से बचने की हिदायत दी है। चन्नी ने हाल ही में अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की बैठक में कहा था कि पंजाब में दलित आबादी 35 से 38 प्रतिशत होने के बावजूद उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। इसके जवाब में प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने कहा था कि जातिवाद के आधार पर राजनीति करने वालों का भविष्य अच्छा नहीं होता।