
सपा नेता रामकिशुन यादव (फोटो- सोशल मीडिया)
लखनऊ: आपातकाल की 50वीं बरसी पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और चंदौली के पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने नवभारत के सीनियर कंटेंट राइटर अक्षय साहू के साथ एक विशेष बातचीत की है। इस बातचीत के दौरान उन्होंने आपातकाल के दौर की पीड़ा और जख्मों को याद करते हुए कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे शर्मनाक अध्याय था। उन्होंने बताया कि कैसे सत्ता के नशे में चूर तत्कालीन सरकार ने संविधान, कानून और जन अधिकारों की धज्जियां उड़ा दी थीं। लेकिन आज का हाल भी कुछ उसी तरह का है। 50 साल पहले घोषित आपातकाल लागू किया गया था और आजकल अघोषित आपातकाल जैसा दर्द महसूस हो रहा है।
पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने बताया कि उस समय उनकी उम्र 17-18 साल थी। उनके पिता, जो पूर्व स्वतंत्रता सेनानी और जिले के एक राजनेता थे। सरकार के गलत नीतियों का विरोध करते रहने और समाजवादी आंदोलन का साथ देने के कारण उन्हें इंदिरा सरकार ने गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया था। उन्होंने कहा कि पूरे आपातकाल के दौरान उन्हें अपने पिता से केवल एक बार जेल में मिलने का मौका मिला। इसके लिए भी उन्हें कई घंटों तक जेल के गेट के बाहर इंतजार करना पड़ा था। क्योंकि उस दौरान जेल में बंद कैदियों के परिवारों को अंदर जाकर मिलने की इजाजत नहीं थी। वो लम्हा याद करके आज भी मन सिहर जाता है। सच में वो लोकतंत्र को कुचलने और जनता की आवाज को दबाने वाले दिन थे।
उन्होंने कहा, आपातकाल के दौरान जनता डरी हुई थी। सरकार में व्याप्त तानाशाही थी, फिर चाहे वो सत्ताधारी पार्टी के नेता हों या अधिकारी। उस दौर में कई तानाशाही फैसले लिए गए, मनमानी की गई, और डर का माहौल बनाया गया। कोई किसी के खिलाफ नहीं बोल सकता था। जनता को संविधान प्रदत्त सभी अधिकारों से वंचित कर दिया गया था। प्रेस पर सेंसरशिप थी और विरोध करने पर जेल में डाल दिया जाता था।
सरकार का विरोध करते विपक्षी नेता (फोटो- सोशल मीडिया)
पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने बताया कि उस दौर में राजनीतिक विरोध को कुचलने के लिए पूरे देशभर में समाजवादियों, पत्रकारों, छात्रों और बुद्धिजीवियों को जेलों में ठूंस दिया गया। हम लोग रातों-रात उठाकर जेल में डाल दिए गए। ना कोई वारंट, ना मुकदमा केवल विरोधियों को पकड़ो और जेल भेजो की नीति पर सरकार व प्रशासन लगा हुआ था।
रामकिशुन यादव ने बताया कि आपातकाल के दौरान संजय गांधी ने नसबंदी को लेकर अभियान चलाया था। हालांकि आज के समय में लोग खुद ही जनसंख्या नियंत्रण के मद्देनजर नसबंदी करा लेते हैं, लेकिन उस समय ऐसा नहीं था, लोगों में इसे लेकर डर था। संजय गांधी के आदेश पर सरकारी अधिकारियों ने नसबंदी के अभियान को सफल दिखाने और उन्हें खुश करने के लिए लोगों की जबरदस्ती नसबंदी करवाई। आपातकाल में नसबंदी को लेकर कई ज्यादतियां हुईं। इसके चलते लोग डर गए थे।
आपातकाल में जनता पर हुए ज्यादतियां (फोटो- सोशल मीडिया)
पूर्व विधायक ने अपने परिवार का एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि उनके बड़े पिता जी के बेटे, जो सरकारी अधिकारी थे, उनका आपातकाल के दौरान बलिया जिले में तबादला हो गया। इससे पूरे परिवार के मन में ये डर बैठ गया कि कहीं उनकी वहीं जबरदस्ती नसबंदी न करवा दी जाए। इसके बाद परिवार ने उन्हें उनके पास मिलने के लिए भेजा। जहां उनके बड़े भाई ने उन्हें आश्वस्त किया कि वो पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं हो रही है
आपातकाल के संजय गांधी के फैसलों और उनके तरीकों पर बोलते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि उस दौर में असली सत्ता संजय गांधी के हाथ में थी। उन्होंने कहा, संजय आपातकाल में सबसे ताकतवर नेता थे, उनका दबदबा था। सरकार पर उन्हीं का नियंत्रण था, लोग उनसे ज्यादा डरते थे। संजय गांधी के आदेश का हर किसी को हर हालत में पालन करना ही होता था।
संजय गांधी (फोटो- सोशल मीडिया)
रामकिशुन यादव ने कहा कि वो उस समय युवा थे और उन्होंने अपने पिता से स्वतंत्रता आंदोलन और महात्मा गांधी के किस्से सुने थे, कि कैसे जिस ब्रिटिश साम्राज्य की सूरज नहीं डूबता था, उसे महात्मा गांधी ने देश से बाहर किया था। उन्हें यकीन था कि आपातकाल भी इसी तरह समाप्त होगा और ये 2 साल बाद 1977 में हुआ भी, कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा।
उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस के सामने जो एकमात्र सशक्त विपक्ष था, वह समाजवादी विचारधारा के लोग थे। हम जयप्रकाश नारायण जी के नेतृत्व में तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर थे। हमारे पास लाठी-गोली नहीं थी, बस लोकतंत्र में विश्वास था।
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सपा नेता ने देश की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए कहा कि 1975 में इंदिरा सरकार ने घोषित आपातकाल लगाया था। आज देश में अघोषित आपातकाल लागू है, जहां सरकार विपक्षी नेताओं से लेकर आम जनता की आवाजों को अनसुना कर रही है। कई प्रकार की मनमानी की जा रही है। इंदिरा सरकार का लगाया आपातकाल तो दो-ढाई साल में समाप्त हो गया था, लेकिन देश में पिछले 11 सालों से अघोषित आपातकाल चल रहा है।






