सीएम ममता से भिड़ने वाले ED अधिकारियों को मिला बड़ा सम्मान, 70वें स्थापना दिवस पर सरकार ने दिया प्रशस्ति पत्र

ED Officers Honored News: I-PAC के ठिकानों पर छापेमारी करने वाले ईडी अधिकारी असिस्टेंट डायरेक्टर विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडीला को ED के 70वें स्थापना दिवस पर सम्मानित किया गया है।
ED Officials Who Clashed with CM Mamata Receive High Honor: Government Awards Certificate of Appreciation on 70th Foundation Day
प्रवर्तन निदेशालय (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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ED Officers Honored For I-PAC Raid: पश्चिम बंगाल में I-PAC के ठिकानों पर छापेमारी करने वाले ईडी अधिकारी असिस्टेंट डायरेक्टर विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडीला को ED के 70वें स्थापना दिवस पर सम्मानित किया गया है। ईडी के 70वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में पंकज चौधरी ने दोनों अधिकारियों को प. बंगाल में रेड के दौरान बेहतरीन काम करने के लिए सर्टिफिकेट प्रदान किया। बता दें कि 8 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल में सॉल्ट लेकर स्थित I-PAC के ऑफिस और लाउडन स्ट्रीट में कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर ईडी ने छापेमारी की थी।

ईडी की तरफ से की गई यह रेड काफी सुर्खियों में रही। अहलावत के प्रशस्तिपत्र के अनुसार, ईडी की संवेदनशील छापेमारी के दौरान अधिकारी ने असाधारण संयम दिखाया। इस दौरान उन्होंने लगातार रिपोर्ट में घटना को दर्ज किया। इसी के आधार पर ईडी घटना को सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में ला सकी।

क्या है पूरा मामला?

कोयला तस्करी मामले की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल में 8 जनवरी 2026 को कोलकाता आई-पैक के साल्ट लेक स्थित ठिकाने और कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन के निवास पर छापेमारी की थी। ईडी द्वारा की गई इस कार्रवाई का विरोध करते हुए राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौके पर पहुंच गई। और कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए वहां से कुछ फाइलों को लेकर निकल गई। मामले को लेकर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मुख्यमंत्री पर कानूनी कार्रवाई में बाधा डलने आरोप लगाया।

यह लोकतंत्र को खतरे में डालने जैसा

मामले की सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा संविधान निर्माताओं ने ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की होगी, कि कभी कोई मुख्यमंत्री केंद्रीय एजेंसियों के जांच के बीच में दखलंदाजी करने पहुंच सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह लोकतंत्र को खतरे में डालने जैसा है।

'जजों को भी बंधक बनाया गया'

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इसे राज्य बनाम केंद्र का मामला बनाने की कोशिश मत कीजिए। मामले में राज्य सरकार के वकील ने ईडी अधिकारियों के सीधे सुप्रीम कोर्ट आने पर सवाल उठाया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमें पता है वहां कैसी स्थिति है। राज्य में SIR का काम कर रहे जजों को भी बंधक बना लिया गया और आप कह रहे हैं कि ईडी को स्थानीय मजिस्ट्रेट के पास जाना चाहिए था।

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