दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण से निपटने का लिए कराना चाहती है कृत्रिम वर्षा, CPCB ने अभी नही दी मंजूरी

सीपीसीबी ने प्रस्तावित प्रयोग की अनुमानित लागत लगभग 3 करोड़ रुपये होगी। प्रस्ताव में न्यूनतम 100 वर्ग किमी का कवरेज क्षेत्र सम्मिलत होंगे। और इसमें 5 उड़ानें (क्लाउड सीडिंग प्रयास) भी शामिल हैं।
दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण से निपटने का लिए कराना चाहती है कृत्रिम वर्षा, CPCB ने अभी नही दी मंजूरी
(कांसेप्ट फोटो सौ. सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली:  दिल्ली NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार कृत्रिम वर्षा कराने की मांग कर रही है। जिसके लिए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखे हैं। दरअसल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा है कि कृत्रिम वर्षा अभी संभव नहीं है।

सीपीसीबी ने आईआईटी कानपुर के क्लाउड सीडिंग प्रस्ताव पर कहा कि हवा में अपर्याप्त नमी और पश्चिमी विक्षोभ से प्रभावित पहले से मौजूद बादलों पर निर्भरता के कारण क्लाउड सीडिंग अभी संभव नहीं है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अभी नही दी अनुमति

बता दें कि सीपीसीबी ने कहा है कि उत्तर भारत में सर्दियों के मौसम में बादल और पश्चिमी विक्षोभ इससे काफी प्रभावित होते हैं। और हवा में नमी की मात्रा कम रहती है। जिससे क्लाउड सीडिंग की संभावना सीमित हो जाती है। सीपीसीबी ने कहा कि ये बहुत खर्चीला भी है। इसके साथ ही प्रस्तावित प्रयोग पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत आने का उम्मीद है। बोर्ड का ये बयान ऐसे समय आया। जब दिल्ली सरकार लगातार केंद्र से कृत्रिम वर्षा कराने की अनुमति मांग रही है। अब गोपाल राय केंद्रीय मंत्री से इस पर विचार करने और बैठक बुलाने का आग्रह किया है।

इसके साथ ही सीपीसीबी ने प्रस्तावित प्रयोग की अनुमानित लागत लगभग 3 करोड़ रुपये होगी। प्रस्ताव में न्यूनतम 100 वर्ग किमी का कवरेज क्षेत्र सम्मिलत होंगे। और इसमें 5 उड़ानें (क्लाउड सीडिंग प्रयास) भी शामिल हैं। प्रस्ताव के हिस्से के रूप में 8 नवंबर 2023 को आईआईटी कानपुर के डॉ. मणिंद्र अग्रवाल और उनकी टीम द्वारा दिल्ली सरकार को पहले एक प्रस्तुति दी गई थी। दरअसल इस प्रस्तुतिकरण में रक्षा, गृह और पर्यावरण समेत 12 प्रमुख एजेंसियों की भागीदारी को रेखांकित किया। और आईआईटी कानपुर ने 2017 की गर्मियों के दौरान क्लाउड सीडिंग परीक्षण आयोजित किया। जिसमें आमतौर पर 7 प्रयासों में से 6 में सफल वर्षा प्राप्त हुई।

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