तमिलनाडु के मोदी का चल गया मैजिक! RSS के स्वयंसेवक से उपराष्ट्रपति तक राधाकृष्णन का ऐसा रहा सफर
Political Journey of CP Radhakrishnan: RSS के स्वयंसेवक से उपराष्ट्रपति पद का सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर काफी उतार चढ़ाव भरा रहा है। वे लोकसभा का तीन बार चुनाव हार चुके हैं।
- Written By: Saurabh Pal
पीएम मोदी के साथ सीपी राधाकृष्णन (फोटो- सोशल मीडिया)
Vice President CP Radhakrishnan: किशोरावस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के ‘स्वयंसेवक’, जनसंघ से राजनीतिक पारी की शुरुआत, 1990 के दशक में भाजपा के सांसद, समर्थकों के बीच ‘तमिलनाडु के मोदी’ के नाम से लोकप्रिय और आज देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए निर्वाचित हुए चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन का सफर निस्संदेह बेमिसाल है।
उपराष्ट्रपति के तौर पर उनका सफर अब अलग तरह का होगा, जिसमें उनके सामने कई चुनौतियां भी होंगी। सबसे बड़ी चुनौती राज्यसभा के सभापति के रूप में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बनाने की होगी, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में विपक्ष ने आसन की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव में तमिलनाडु के मोदी का मैजिक
राधाकृष्णन (77 वर्ष) देश के 15वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के भारी अंतर से पराजित किया। अब तक महाराष्ट्र के राज्यपाल की भूमिका रहे 67 वर्षीय राधाकृष्णन किशोरावस्था में ही आरएसएस और जनसंघ से जुड़ गए थे। वह 1990 के दशक के अंत में कोयंबटूर से दो बार लोकसभा चुनाव जीते और उनके समर्थक उन्हें ‘तमिलनाडु का मोदी’ कहते हैं।
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3 बार हारे लोकसभा का चुनाव
राधाकृष्णन ने 1998 और 1999 में कोयंबटूर लोकसभा सीट से दो बार चुनाव जीता, हालांकि इसके बाद उन्हें इस सीट से लगातार तीन बार हार का सामना करना पड़ा। तमिलनाडु में सभी दलों में उन्हें काफी सम्मान हासिल है और यही वजह है कि भाजपा ने उन्हें कई राज्यों का राज्यपाल बनाया। उन्होंने 31 जुलाई, 2024 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में शपथ ली। इससे पहले, उन्होंने लगभग डेढ़ साल तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। झारखंड के राज्यपाल के रूप में, उन्हें तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।
16 साल की उम्र में ली थी RSS की सदस्यता
सीपी राधाकृष्णन विभिन्न राज्यों में राज्यपाल पद संभालने के बाद भी, वह अक्सर तमिलनाडु का दौरा करते रहे हैं। अपने हालिया तमिलनाडु दौरे के दौरान उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन से भी मुलाकात की थी। तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। तमिलनाडु के तिरुपुर में 20 अक्टूबर, 1957 को जन्मे राधाकृष्णन के पास व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक की डिग्री है। 16 साल की उम्र में आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में शुरुआत करने वाले राधाकृष्णन 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य बने।
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1999 में जीते लोकसभा का पहला चुनाव
वर्ष 1996 में, राधाकृष्णन को भाजपा की तमिलनाडु इकाई का सचिव नियुक्त किया गया। वह 1998 में कोयंबटूर से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए और 1999 में वह फिर से इस सीट से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों के अध्यक्ष और सदस्य के रूप में कार्य किया।
2004 में बने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष
वर्ष 2004 से 2007 के बीच, राधाकृष्णन भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष रहे। इस पद पर रहते हुए, उन्होंने 19,000 किलोमीटर की ‘रथ यात्रा’ की, जो 93 दिनों तक चली। एक उत्साही खिलाड़ी राधाकृष्णन टेबल टेनिस में कॉलेज चैंपियन और लंबी दूरी के धावक रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि 2004 में द्रमुक द्वारा राजग से संबंध समाप्त करने के बाद तमिलनाडु में भाजपा के लिए नया गठबंधन बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।-एजेंसी इनपुट के साथ
