कॉन्स्टिट्यूशन क्लब चुनाव पर राजीव प्रताप रूडी की 25 साल पुरानी पकड़ बरकरार, संजीव बालियान को हराया
Constitution Club Election में बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित कर दिया। रूडी ने अपने ही पार्टी के प्रतिद्वंदी सांसद संजीव बालियान को 100 से ज्यादा वोटों से मात दी है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
राजीव प्रताप रूडी, फोटो: सोशल मीडिया
Constitution Club Of India: कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया चुनाव के इस मुकाबले को “बीजेपी बनाम बीजेपी” के तौर पर देखा जा रहा था, क्योंकि दोनों प्रत्याशी सत्तारूढ़ दल से थे। मतदान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, कांग्रेस की सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, किरेन रिजिजू और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला भी मतदान करने पहुंचे।
अधिकारियों की मानें तो 1,295 वर्तमान और पूर्व सांसदों में से 680 से अधिक ने वोट डाले, जो क्लब के इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान है। 11 कार्यकारी सदस्यों के लिए 14 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ। चौदह प्रत्याशियों में रुडी और बालियान के बीच इस बार कड़ी टक्कर मानी जा रही थी।
बीजेपी के भीतर टक्कर
रूडी और बालियान दोनों अलग-अलग राजनीतिक व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। रूडी एक सौम्य, सुलझे और शहरी छवि वाले नेता हैं, जबकि बालियान का व्यक्तित्व ग्रामीण संवेदनाओं और जमीनी राजनीति से जुड़ा है। जातीय समीकरण भी इस चुनाव में अहम रहे — रूडी ठाकुर समुदाय से आते हैं और बालियान जाट समुदाय से — लेकिन व्यक्तिगत संबंधों और पुराने नेटवर्क ने अंतिम नतीजे को प्रभावित किया।
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रूडी को विपक्ष से भी मिला समर्थन
सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों से जुड़े कई सांसदों ने रूडी के पक्ष में मतदान किया, जबकि बीजेपी के भीतर मत विभाजित थे। निशिकांत दुबे जैसे नेताओं ने बालियान के समर्थन में जोरदार प्रचार किया, लेकिन परिणाम रूडी के पक्ष में गया।
पुरानी पकड़ और वादे
रूडी ने अपने कार्यकाल के दौरान क्लब में कई आधुनिक सुविधाएं जोड़ीं और आगे भी विकास का भरोसा दिया। रुडी ने अगले कार्यकाल में क्लब में नई सुविधाएं जोड़ने और इसके आधुनिकीकरण का जिक्र किया था तो वहीं बालियान बदलाव के पक्ष में थे और क्लब को बाहरी लोगों की बजाय सांसदों की जरूरतों पर केंद्रित करने की मांग कर रहे थे न कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों जैसे बाहरी लोगों पर।
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आपको बता दें कि लोकसभा अध्यक्ष क्लब के पदेन अध्यक्ष होते हैं, लेकिन सचिव का पद क्लब के दैनिक संचालन में अहम होता है। इस जीत के साथ, रूडी ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अपना 25 साल पुराना दबदबा बरकरार रखा।
