महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: नासिक और जलगांव में महायुति की बगावत खत्म, प्रसाद हीरे और रेश्मा काले पीछे हटे
Nashik Mahayuti: उत्तर महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में महायुति का संकट टला। नासिक से भाजपा के प्रसाद हीरे और जलगांव से शिंदे गुट की रेश्मा काले ने बगावत छोड़ अधिकृत प्रत्याशियों को दिया समर्थन।
- Written By: रूपम सिंह
मंत्री गिरीश महाजन (सोर्स - सोशल मिडिया)
Nashik MLC Election Eknath Shinde: उत्तर महाराष्ट्र की नासिक और जलगांव स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया में महायुति के सामने खड़ा हुआ बगावत का संकट आखिरकार समाप्त हो गया है। नासिक में भाजपा के बागी उम्मीदवार प्रसाद हीरे और जलगांव में शिंदे गुट की बागी उम्मीदवार रेश्मा काले ने चुनावी मुकाबले से पीछे हटकर महायुति के अधिकृत उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इससे गठबंधन के भीतर मतों के विभाजन का खतरा टल गया है और चुनावी समीकरण महायुति के पक्ष में मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। जलगांव में पिछले कई दिनों से चर्चा में रहीं रेश्मा काले ने मुंबई में एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद अपना प्रचार अभियान रोकने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि वे शिंदे के निर्देशों का सम्मान करते हुए महायुति के अधिकृत उम्मीदवार नंदकिशोर महाजन का समर्थन करेंगी। काले के इस फैसले से जलगांव में महायुति के सामने खड़ा बड़ा राजनीतिक संकट समाप्त हो गया। काले के चुनाव मैदान में बने रहने से महायुति नेताओं की चिंता बढ़ गई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि उनकी बगावत चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद उन्होंने गठबंधन की एकजुटता को प्राथमिकता देते हुए पीछे हटने का निर्णय लिया, इधर नाशिक में भी भाजपा के बागी उम्मीदवार प्रसाद हीरे ने चुनाव से हटने की घोषणा कर दी। उद्योग मंत्री उदय सामंत, मदादा भूसे और गिरीश महाजन के साथ हुई बैठक के बाद हीरे ने चुनाव से पीछे हटने का फैसला लिया।
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विपक्ष की रणनीति पर पड़ा असर
मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि वे पहले से दावा कर रहे थे कि दोनों बागी उम्मीदवार अंततः गठबंधन के हित में फैसला लेंगे। अब नाशिक और जलगांव दोनों स्थानों पर महायुति के भीतर का विवाद समाप्त हो गया है। नाशिक और जलगांव में बागी उम्मीदवारों के पीछे हटने से महायुति को बड़ी राजनीतिक राहत मिली है।
विधान परिषद चुनाव से पहले गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने में नेतृत्व सफल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से विपक्ष की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है और उत्तर महाराष्ट्र में महायुति की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
