तमिलनाडु लड़ेगा और जीतेगा…, परिसीमन प्रस्ताव के विरोध में उतरे MK स्टालिन, काला झंडा फहराकर जलाई बिल की कॉपी
CM Stalin Protest: मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन प्रस्ताव के खिलाफ तमिलनाडु में काले झंडे फहराकर और प्रतियों को जलाकर विरोध शुरू किया है, जिसे उन्होंने दक्षिणी राज्यों के साथ विश्वासघात बताया।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
सीएम स्टालिन ने जलाई परिसीमन प्रस्ताव की प्रति, फोटो- सोशल मीडिया
Tamil Nadu Delimitation: तमिलनाडु की राजनीति में आज एक बार फिर दिल्ली बनाम चेन्नई की जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में लोग केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। गुरुवार की सुबह मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने आवास पर काला झंडा फहराया और विवादित विधेयक की प्रतियों को आग के हवाले कर दिया।
स्टालिन का साफ कहना है कि तमिलनाडु अपनी आवाज को दबने नहीं देगा और हक की इस लड़ाई में वह आखिरी दम तक लड़ेगा। यह विरोध प्रदर्शन उस समय शुरू हुआ है जब दक्षिण भारत के राज्यों में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी कम होने का डर सता रहा है।
परिसीमन प्रस्ताव की प्रतियां जलाकर स्टालिन ने जताया विरोध
मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस प्रदर्शन के जरिए केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है। चेन्नई में उनके आवास के बाहर काले झंडे लहरा रहे हैं और पूरे राज्य में डीएमके कार्यकर्ता इस विरोध को बूथ स्तर तक ले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे एक काला कानून करार दिया है जो राज्य के हितों के खिलाफ है।
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उन्होंने अपने समर्थकों और आम जनता से आह्वान किया है कि अगले तीन दिनों तक हर घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर काला झंडा लगाकर इस अन्याय के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराएं। यह विरोध प्रदर्शन केवल राजधानी तक सीमित नहीं है बल्कि अब यह तमिलनाडु के हर निगम, शहर और कस्बे के वार्डों तक फैल चुका है।
जनसंख्या नियंत्रण की कोशिश बनी तमिलनाडु के लिए सजा?
स्टालिन का सबसे बड़ा तर्क यह है कि तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने देश के विकास में योगदान दिया और जनसंख्या को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया। अब उन्हें इसी सफलता की सजा देने की तैयारी की जा रही है। अगर लोकसभा सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो उन राज्यों को ज्यादा फायदा होगा जिन्होंने अपनी आबादी पर लगाम नहीं लगाई है।
स्टालिन का सवाल है कि क्या बेहतर प्रदर्शन करने की वजह से दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत को छीन लिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए दक्षिण के लोगों को अपने ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है।
दक्षिणी राज्यों की आवाज दबाने की कोशिश पर बिफरे स्टालिन
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस खतरे के प्रति लोगों को पहले ही आगाह कर दिया था। उनका मानना है कि केंद्र सरकार इस संशोधन के जरिए उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत को और मजबूत करना चाहती है ताकि दक्षिणी राज्यों के प्रभाव को पूरी तरह सीमित किया जा सके। इसे उन्होंने दक्षिणी राज्यों के साथ एक बड़ा विश्वासघात बताया है।
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स्टालिन ने चेतावनी दी है कि परिसीमन का आधार केवल सिरों की गिनती या जनसंख्या नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार केंद्र सरकार यह दावा तो कर रही है कि सीटों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन हकीकत में यह पूरा खेल केवल उत्तर के राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखकर खेला जा रहा है।
स्टालिन ने दिया नारा
इस बीच स्टालिन ने एक नारा भी दिया- ‘तमिलनाडु लड़ेगा और जीतेगा’। अब हर प्रदर्शनकारी की जुबान पर यह नारा चढ़ चुका है। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल संसद की सीटों की नहीं बल्कि क्षेत्रीय पहचान और आत्मसम्मान की बन चुकी है जिसे नजरअंदाज करना अब केंद्र के लिए आसान नहीं होगा।
