सुप्रीम कोर्ट में जूता उछाले जाने पर CJI गवई ने दो दिन बाद तोड़ी चुप्पी, जानिए क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई चौंकाने वाली घटना के दो दिन बाद मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई (CJI BR Gavai) ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि वे और उनके साथी न्यायाधीश इस कृत्य से स्तब्ध हैं, और…
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, फोटो- सोशल मीडिया
Justice BR Gavai: इसी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राकेश किशोर ने मुख्य न्यायाधीश की बेंच की ओर जूता उछाल दिया और नारेबाजी करते हुए कहा, “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे।” यह घटना तब हुई जब कोर्ट नंबर 1 में उस दिन की पहली सुनवाई शुरू हुई थी।
सौभाग्य से जूता बेंच तक नहीं पहुंचा और नीचे गिर गया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत आरोपी वकील को काबू में कर बाहर निकाल दिया। घटना के दौरान कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने पूर्ण संयम बरतते हुए कार्यवाही जारी रखी। CJI गवई ने कोर्ट स्टाफ को निर्देश देते हुए कहा, “मैं ऐसी चीजों से प्रभावित होने वाला आखिरी व्यक्ति हूं। इस सब से विचलित न हों। हम विचलित नहीं हैं।”
‘हम स्तब्ध हैं, पर यह अब बीती बात है’
दो दिन बाद मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश ने पहली बार इस घटना पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “सोमवार को जो हुआ, उससे मैं और मेरे विद्वान सहयोगी बहुत स्तब्ध हैं। लेकिन हमारे लिए यह एक भुला हुआ अध्याय है।” उनके इस बयान को न्यायिक गरिमा और सहनशीलता का उदाहरण माना जा रहा है।
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सॉलिसिटर जनरल ने भी की निंदा
घटना के दौरान कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस व्यवहार को “अक्षम्य” बताते हुए कहा, “मुख्य न्यायाधीश की इस घटना को समाप्त मानने की उदारता और महानता प्रशंसनीय है।” इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोमवार शाम को CJI गवई से फोन पर बातचीत की और इस कृत्य को “बेहद निंदनीय” बताया।
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‘यह कोई मजाक की बात नहीं’- जस्टिस भुइयां
बेंच के सदस्य जस्टिस भुइयां ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “”इस पर मेरे अपने विचार हैं। वह भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं – यह कोई मज़ाक की बात नहीं है। वर्षों से न्यायाधीशों के रूप में, हम कई ऐसे काम करते हैं जो दूसरों को उचित नहीं लगते, लेकिन इससे हमने जो किया उसके बारे में हमारी राय नहीं बदलती।” गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई। हालांकि दिल्ली पुलिस ने आरोपी वकील से कई घंटों तक पूछताछ की और इसके बाद उसे रिहा कर दिया गया।
