CDS जनरल अनिल चौहान का बढ़ गया गया कार्यकाल, जानिए कब तक संभालेंगे पद
Defence Ministry ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 तक बढ़ा दिया है। इस दौरान वह मिलिट्री अफेयर्स विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाते रहेंगे।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
सीडीएस अनिल चौहान (फोटो-सोशल मीडिया)
भारत सरकार ने देश के वर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल को बढ़ा दिया है। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी कि अब वह 30 मई 2026 तक इस पद पर बने रहेंगे या फिर किसी नए आदेश तक कार्यरत रहेंगे। जनरल चौहान भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिनका करियर अनुकरणीय सेवाओं से भरा रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के रूप में अब 30 मई 2026 तक बढ़ा दिया गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इससे पहले कोई नया आदेश आता है, तो वह मान्य होगा। जनरल चौहान की नियुक्ति 30 सितंबर 2022 को हुई थी, और उनका कार्यकाल तीन साल का तय था, जो इस साल सितंबर में खत्म होने वाला था।
1981 में सेना में हुए थे शामिल
जनरल अनिल चौहान 1981 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ पदों पर कार्य किया है। रिटायरमेंट के बाद भी वह सक्रिय भूमिका में रहे और नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट में मिलिट्री एडवाइजर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं।
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सेना में उत्कृष्ट सेवा के लिए मिले कई पुरस्कार
जनरल चौहान को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। ये सभी पुरस्कार उनके सैन्य नेतृत्व और समर्पण का प्रतीक हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मौके पर हुई तारीफ
हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में तीनों सेनाओं के बीच बेहतरीन तालमेल देखा गया, जिसका श्रेय भी जनरल चौहान को दिया गया। उनकी रणनीतिक सोच और नेतृत्व ने इस संयुक्त अभियान को सफल बनाया। वर्तमान में वे तीनों सेनाओं के एकीकरण की दिशा में काम कर रहे हैं, जो भारतीय रक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
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जनरल अनिल चौहान का सेवा विस्तार न सिर्फ उनके अनुभव और योग्यता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि सरकार तीनों सेनाओं के तालमेल और एकीकृत कमान प्रणाली को प्राथमिकता दे रही है। 2026 तक उनका नेतृत्व देश की रक्षा नीति को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
