चंद्रशेखर आजाद की मूंछों पर ताव वाली मशहूर तस्वीर किसने खींची? झांसी के रुद्र नारायण की अनसुनी कहानी
Chandrashekhar Azad Story: काकोरी कांड के बाद मास्टर रुद्र नारायण ने चंद्रशेखर आजाद को करीब तीन वर्षों तक अंग्रेजों से छिपाकर रखा। 25 हजार रुपये के इनाम का लालच भी उनकी देशभक्ति को नहीं डिगा सका।
- Written By: अर्पित शुक्ला
जरा याद करो कुर्बानी (AI Image)
Chandrashekhar Azad Image Story: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं, जो आज भी देशभक्ति की मिसाल माने जाते हैं। काकोरी कांड के बाद जब अंग्रेजी हुकूमत उन्हें हर हाल में गिरफ्तार करना चाहती थी, तब झांसी के क्रांतिकारी मास्टर रुद्र नारायण ने अपनी जान और परिवार की परवाह किए बिना उन्हें करीब तीन वर्षों तक सुरक्षित शरण दी।
काकोरी कांड के बाद झांसी पहुंचे थे आजाद
1925 के काकोरी कांड के बाद अंग्रेजी पुलिस चंद्रशेखर आजाद की तलाश में पूरे देश में अभियान चला रही थी। ऐसे में वह झांसी पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात मास्टर रुद्र नारायण से हुई। शुरुआत में रुद्र नारायण उन्हें अपने घर के तलघर में छिपाकर रखते थे, लेकिन पुलिस की गतिविधियां बढ़ने पर उन्होंने ओरछा के पास सातार नदी किनारे स्थित हनुमान मंदिर की गुफा में उनके रहने की व्यवस्था कर दी। यहीं से क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन होता था।
अंग्रेजों ने दिया 25 हजार रुपये का लालच
इतिहासकारों के अनुसार, अंग्रेज अधिकारियों को मास्टर रुद्र नारायण पर शक था। जब तमाम कोशिशें नाकाम रहीं तो उन्होंने उन्हें 25 हजार रुपये देने का प्रस्ताव रखा और कहा कि आजाद को पकड़वा दें। मास्टर रुद्र नारायण ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों के सामने सिर झुकाना पड़े। उनके लिए देशभक्ति किसी भी आर्थिक लालच से कहीं बड़ी थी।
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मास्टर रुद्र नारायण (Image- Social Media)
भूखे रहना मंजूर, देशद्रोह नहीं
बताया जाता है कि आर्थिक तंगी के दिनों में एक बार चंद्रशेखर आजाद ने मजाक में कहा कि उन्हें अंग्रेजों के हवाले कर दिया जाए, ताकि परिवार को दो वक्त की रोटी मिल सके। इस पर मास्टर रुद्र नारायण का जवाब था कि भूखे रहकर मर जाना मंजूर है, लेकिन देशद्रोह की रोटी स्वीकार नहीं।
छोटे भाई की तरह रहते थे आजाद
मास्टर रुद्र नारायण के परिवार के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद उनके घर में छोटे भाई की तरह रहते थे। उनके इस्तेमाल का पलंग और कई स्मृतियां आज भी परिवार ने सुरक्षित रखी हैं। परिवार का कहना है कि इन धरोहरों से उन्हें देशभक्ति की प्रेरणा मिलती है।
चंद्रशेखर आजाद की पहली और आखिरी तस्वीर
मास्टर रुद्र नारायण एक कुशल फोटोग्राफर भी थे। उन्होंने ही चंद्रशेखर आजाद की वह ऐतिहासिक तस्वीर खींची थी, जिसमें वह अपनी प्रसिद्ध मूंछों पर ताव देते हुए दिखाई देते हैं। यही तस्वीर आजाद की सबसे चर्चित और ऐतिहासिक तस्वीर मानी जाती है। इसके अलावा उन्होंने आजाद की एक तस्वीर अपने परिवार के साथ भी खींची थी।
चंद्रशेखर आजाद की पहली और आखिरी तस्वीर (Image- Social Media)
तस्वीर नष्ट करने का संदेश भी आया था
झांसी छोड़ने के बाद चंद्रशेखर आजाद ने क्रांतिकारी विश्वनाथ वैशम्पायन के माध्यम से संदेश भेजा कि उनकी तस्वीर नष्ट कर दी जाए, ताकि वह अंग्रेजों के हाथ न लग सके। हालांकि मास्टर रुद्र नारायण ने यह सोचकर तस्वीर सुरक्षित रखी कि स्वतंत्र भारत में आने वाली पीढ़ियां इस महान क्रांतिकारी को कैसे याद रखेंगी। उन्होंने आजीवन इस तस्वीर को धरोहर की तरह संभालकर रखा और आज भी यह उनके परिवार के पास सुरक्षित है।
1945 में स्थापित कर दी थी रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा
इतिहासकारों के मुताबिक, मास्टर रुद्र नारायण केवल क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि चित्रकार, मूर्तिकार और फोटोग्राफर भी थे। उन्होंने अंग्रेजी शासन के दौरान ही 1945 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित कर दी थी। यह कदम उस दौर में अंग्रेजी सत्ता को खुली चुनौती माना गया।
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आज झांसी में जिस इलाके में मास्टर रुद्र नारायण का घर है, वह उनके सम्मान में रुद्र नारायण मोहल्ला के नाम से जाना जाता है। उनका घर और वहां सुरक्षित चंद्रशेखर आजाद की स्मृतियां भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।
