उज्जैन के इस मंदिर में 15 नहीं बल्कि 11 अगस्त को मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस; जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी
Fascinating Story Of Ujjain Temple: उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में 15 नहीं, 11 अगस्त को मनाया जाएगा स्वतंत्रता दिवस। वर्षों पुरानी परंपरा के तहत अंग्रेजी तारीख नहीं।
- Reported By: अजय नीमा | Edited By: सजल रघुवंशी
उज्जैन का यह मंदिर 11 अगस्त को मनाएगा स्वतंत्रता दिवस ( सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)
Ujjain Temple Celebrates Independence August 11: देशभर में स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है, लेकिन धार्मिक नगरी उज्जैन के प्रसिद्ध बड़े गणेश मंदिर में इस बार आजादी का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इसकी वजह मंदिर की वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसके अनुसार राष्ट्रीय पर्व अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख के बजाय उस वैदिक तिथि पर मनाए जाते हैं, जिस दिन संबंधित ऐतिहासिक घटना घटी थी।
मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य पं. अक्षत व्यास ने बताया कि भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली थी। उस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी। वर्ष 2026 में यही तिथि 11 अगस्त को पड़ रही है, इसलिए मंदिर में स्वतंत्रता दिवस का आयोजन इसी दिन किया जाएगा।
11 अगस्त को मंदिर में होगा विशेष आयोजन
इस अवसर पर सुबह भगवान बड़े गणेश का विशेष अभिषेक और पूजन होगा। इसके बाद गणपति स्तोत्र का सहस्र पाठ, ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और भारत माता का पूजन किया जाएगा। स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी तथा देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रसाद वितरण का आयोजन भी होगा।
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गणतंत्र दिवस भी तिथि के अनुसार मनाने की परंपरा
पं. अक्षत व्यास ने बताया कि बड़े गणेश मंदिर में केवल स्वतंत्रता दिवस ही नहीं, बल्कि गणतंत्र दिवस, हिंदी दिवस और कई महापुरुषों की जयंती भी उनकी मूल वैदिक तिथि के अनुसार मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। उनका मानना है कि भारतीय संस्कृति में तिथि का विशेष महत्व है और इसी परंपरा को आज भी मंदिर में जीवंत रखा गया है।
आजादी की लड़ाई में मंदिर ने निभाई थी अहम भूमिका
पं. अक्षत व्यास ने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय बड़े गणेश मंदिर परिसर में एक गुरुकुल संचालित होता था। उस दौर में कई क्रांतिकारियों को यहां गुप्त रूप से सहयोग भी मिला। मंदिर परिसर में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के चित्र भी स्थापित किए गए थे, जो देशभक्ति और बलिदान की उस विरासत की याद दिलाते हैं।
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मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इस परंपरा का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय पर्व मनाना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक सम्मानपूर्वक पहुंचाना भी है।
