ससुर को सत्ता से हटाया और बदल दी हैदराबाद की किस्मत; वो नेता जिसके एक इशारे पर आज भी हिल जाती है दिल्ली
Andhra Pradesh: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू आज 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। किसान परिवार से निकलकर साइबराबाद के निर्माता और चौथी बार मुख्यमंत्री बनने तक उनका सफर प्रेरणादायक रहा है।
- Written By: अक्षय साहू
एनटीआर के साथ चंद्रबाबू नायडू (सोर्स- सोशल मीडिया)
Chandrababu Naidu Birthday: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्हें लोग प्यार से सीबीएन या चंद्रबाबू कहते हैं। वे तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और आंध्र प्रदेश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने राज्य के आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में अहम भूमिका निभाई है। उनका जन्म 20 अप्रैल 1950 को हुआ था।
चंद्रबाबू नायडू का जन्म चित्तूर जिले के नारावरिपल्ली गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता नारा खारजुरा नायडू खेती करते थे और माता अमानम्मा गृहिणी थीं। वे बचपन में रोज़ 11 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे। उन्होंने तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक (1972) और परास्नातक (1974) की पढ़ाई की। उन्होंने पीएचडी की शुरुआत की थी, लेकिन राजनीति के कारण इसे पूरा नहीं कर सके।
छात्र जीवन से राजनीति की शुरुआत
चंद्रबाबू नायडू ने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रखा। वे विश्वविद्यालय में छात्र नेता रहे। 1970 के दशक में वे युवा कांग्रेस से जुड़े और बाद में इंदिरा गांधी के समय में स्थानीय स्तर पर पद संभाला। 1978 में वे 28 साल की उम्र में चंद्रगिरि सीट से विधायक चुने गए। 1980 से 1983 तक वे राज्य सरकार में मंत्री भी रहे।
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टीडीपी और एनटीआर से जुड़ाव
1980 में उन्होंने नंदमूरी तारक रामाराव (एनटीआर) की बेटी भुवनेश्वरी से विवाह किया। एनटीआर तेलुगु सिनेमा के पहले और सबसे बड़े सुपरस्टार और टीडीपी के संस्थापक थे। 1983 में एनटीआर ने टीडीपी बनाई और सत्ता में आए। 1984 में चंद्रबाबू ने पार्टी को राजनीतिक संकट से बचाने में अहम भूमिका निभाई और धीरे-धीरे एनटीआर के करीबी बन गए। 1985 में वे टीडीपी के महासचिव बने।
ससुर को हटाकर पहली बार बने मुख्यमंत्री
1994 में टीडीपी ने फिर से जीत दर्ज की, लेकिन 1995 में पार्टी के भीतर बड़ा बदलाव हुआ। चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर एनटीआर को हटाकर मुख्यमंत्री पद संभाला। यह उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा और विवादित मोड़ माना जाता है।
हैदराबाद को बनाया साइबराबाद
1995 से 2004 तक वे दो बार मुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश को आईटी हब बनाने पर जोर दिया और हैदराबाद को साइबराबाद के रूप में विकसित किया।
चंद्रबाबू नायडू ने अपने विजन से बदली हैदराबाद की किस्मत (सोर्स- सोशल मीडिया)
उनकी नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी आकर्षित किया और बिल क्लिंटन व टोनी ब्लेयर जैसे वैश्विक नेता उनसे मिले। 2004 के बाद कांग्रेस की जीत के साथ वे विपक्ष में चले गए। इस दौरान उन्होंने पार्टी को मजबूत बनाए रखा और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
आंध्र प्रदेश विभाजत के पहले मुख्यमंत्री
2014 में तेलंगाना अलग राज्य बना और आंध्र प्रदेश का पुनर्गठन हुआ। टीडीपी ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई और चंद्रबाबू नायडू नए आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। इस कार्यकाल में उन्होंने अमरावती को नई राजधानी के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया।
2019 में हार के बाद दमदार वापसी
2019 में वाईएसआर कांग्रेस की जीत के बाद वे फिर विपक्ष में चले गए। इस दौरान उन्होंने कई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चंद्रबाबू नायडू (सोर्स- सोशल मीडिया)
एक विजनरी लीडर की पहचान
2024 के विधानसभा चुनाव में टीडीपी ने शानदार जीत दर्ज की और 12 जून 2024 को चंद्रबाबू नायडू ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे अब एनडीए गठबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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चंद्रबाबू नायडू को एक विजनरी लीडर माना जाता है। उन्होंने प्रशासन में तकनीक और डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा दिया। उनकी राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही, लेकिन हर बार उन्होंने मजबूत वापसी की। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर चंद्रबाबू नायडू ने भारतीय राजनीति में बड़ा स्थान हासिल किया। उनका जीवन संघर्ष, रणनीति और विकास के विजन का प्रतीक माना जाता है। उनका राजनीतिक सफर अभी भी जारी है।
