‘राम’ के साथ ‘गांधी’ को साध रहे मोदी? बजट में किया गया वो ऐलान…जिससे नहीं होगा मनरेगा खत्म करने का नुकसान?
Mahatma Gandhi Gram Swaraj Yojana: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 2026-27 का बजट पेश किया। घोषणाओं में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक उद्योगों को आगे बढ़ाने पर खास ध्यान दिया है
- Written By: अभिषेक सिंह
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 2026-27 का बजट पेश किया। घोषणाओं में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक उद्योगों को आगे बढ़ाने पर खास ध्यान दिया गया। इस कड़ी में महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना की घोषणा की गई। यह योजना समर्थ 2.0 मिशन से जुड़ी है, जिसका मकसद टेक्सटाइल स्किल्स इकोसिस्टम को मॉडर्न बनाना है।
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना खादी हथकरघा और हस्तशिल्प को सिर्फ सांस्कृतिक प्रतीक के तौर पर नहीं, बल्कि मजबूत रोजगार मॉडल के तौर पर स्थापित करने की कोशिश है। यह योजना टेक्नोलॉजी, स्किल्स और मार्केट कनेक्टिविटी पर जोर देती है, जिसमें प्राकृतिक, मानव निर्मित और नए जमाने के फाइबर शामिल हैं। इससे गांव आधारित कारीगरी को संगठित सपोर्ट मिलेगा, जिससे रोजगार, उत्पादन और आय बढ़ेगी।
PM मोदी ने मार दिया ‘मास्टरस्ट्रोक’
केंद्र की मोदी सरकार ने जब महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून खत्म कर विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 लागू कर दिया। इस योजना के तहत काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए। लेकिन महात्मा गांधी का नाम हटाने की वजह से विपक्ष ने सरकार को जमकर निशाना बनाया।
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भाजपा के बनेगी लिए सुरक्षा कवच?
भारतीय जनता पार्टी ने VB-G RAM G बिल में ‘राम’ का नाम होने का दावा करते हुए विपक्ष पर पलटवार किया। लेकिन राजनैतिक विश्लेषकों का मानना था कि चुनावी दौर में विपक्ष महात्मा गांधी का नाम हटाने के मुद्दे को धार देकर बीजेपी और पीएम मोदी को घेर सकता था। ऐसे में अब महात्मा गांधी के नाम पर ग्राम स्वराज योजना को लेकर आना सुरक्षा कवच का काम करेगी।
क्या है ग्राम स्वराज योजना का लक्ष्य?
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना का मकसद बिखरी हुई ग्रामीण कारीगरी के लिए एक कॉमन प्लेटफॉर्म देना है। खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को स्थानीय पहचान से बदलकर संगठित रोजगार मॉडल में बदला जाएगा। यह क्लस्टर-आधारित काम, डिजाइन सपोर्ट, ट्रेनिंग और मार्केट लिंकेज के जरिए हासिल किया जाएगा।
यह योजना प्राकृतिक, मानव निर्मित और नए जमाने के फाइबर के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है, जिससे यह पक्का हो सके कि प्रोडक्ट आधुनिक जरूरतों को पूरा करें। स्थानीय कारीगरों को उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण, सही डिजाइन मार्गदर्शन और अपने प्रोडक्ट बेचने के नए रास्ते मिलेंगे। जिसका लक्ष्य यह पक्का करना है कि गांवों में बने प्रोडक्ट सीधे बाजार तक पहुंचें और कारीगरों को उनके काम का सही दाम मिले।
इस योजना से किसे होगा फायदा?
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना बढ़ई, हथकरघा बुनकर, कालीन बुनकर और खादी और हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को इस योजना से फायदा होगा। सरकार काम की गति और गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक मशीनरी और उपकरण खरीदने में मदद करेगी। समर्थ 2.0 मिशन टेक्सटाइल स्किल्स इकोसिस्टम को अपग्रेड करेगा।
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यह ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग को इंटीग्रेट करेगा। कारीगरों की सालाना आय बढ़ाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। बेहतर उत्पादन, बेहतर पैकेजिंग और सीधे बाजार तक पहुंच से उनके प्रोडक्ट की मांग बढ़ेगी। इससे यह पक्का होगा कि पारंपरिक स्किल्स न सिर्फ जिंदा रहें, बल्कि अच्छी कमाई का जरिया भी बनें।
