
SIR के खौफ से देशभर में अब तक 8 कर चुके है खुदुकशी (फोटो- सोशल मीडिया)
SIR BLO Suicide Case: देश भर में चल रहा मतदाता सूची सुधार का काम अब जानलेवा साबित हो रहा है। काम का दबाव इस कदर बढ़ गया है कि बूथ लेवल ऑफिसर्स यानी BLO मौत को गले लगाने को मजबूर हो रहे हैं। हाल ही में गुजरात के एक शिक्षक ने काम के बोझ से टूटकर अपनी जान दे दी। मरने से पहले उन्होंने जो लिखा वह किसी को भी झकझोरने के लिए काफी है। यह सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि देश भर में अब तक आठ ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिन्होंने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार तालुका के छारा गांव में शिक्षक अरविंद वाढ़ेर BLO के तौर पर तैनात थे। 40 वर्षीय अरविंद पर SIR यानी स्पेशल समरी रिवीजन का इतना दबाव था कि उन्होंने आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उन्होंने पत्नी संगीता और बेटे कृषय से माफी मांगते हुए लिखा कि अब उनसे यह SIR का काम नहीं हो पाएगा। उन्होंने अपने बैग में रखे कागजात स्कूल में जमा कराने की बात लिखी और कहा कि वह थकान और परेशानी के चलते पूरी तरह मजबूर हो चुके हैं और उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है।
यह खौफनाक सिलसिला सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है। अरविंद वाढ़ेर की तरह देश के अलग-अलग हिस्सों में बीएलओ भारी तनाव में हैं। राजस्थान के जयपुर में 16 नवंबर को एक सरकारी शिक्षक ने आत्महत्या कर ली, तो वहीं सवाई माधोपुर में काम के तनाव से एक बीएलओ को हार्ट अटैक आ गया। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में एक बीएलओ ने आत्महत्या की और पूर्व बर्धमान में ब्रेन स्ट्रोक से एक की जान चली गई। केरल के कन्नूर में भी तनाव के चलते एक मौत हुई है। तमिलनाडु के कुंभकोणम में तो एक बुजुर्ग महिला बीएलओ ने काम के बोझ से परेशान होकर 44 गोलियां खाकर जान देने की कोशिश की।
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अरविंद वाढ़ेर की मौत के बाद शिक्षक संघों और शिक्षा समुदाय में गहरा आक्रोश है। इस घटना के बाद अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, गुजरात प्रांत ने SIR के तहत शिक्षकों द्वारा की जा रही ऑनलाइन प्रक्रिया का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। संघ अब आगे की रणनीति बना रहा है। अधिकांश मामलों में पीड़ित परिवारों का सीधा आरोप है कि अत्यधिक कार्यभार और मतदाता सूची से जुड़ा भारी दबाव इन मौतों की मुख्य वजह है। प्रशासन के लिए अब यह सोचना जरूरी हो गया है कि आखिर चुनावी काम का यह दबाव और कितनी जान लेगा।






