बेअदबी विरोधी बिल को भगवंत मान कैबिनेट की मंजूरी, नियम तोड़ा तो जेल और जुर्माना
पंजाब सरकार ने धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए कैबिनेट में एक सख्त कानून के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। सीएम भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मसौदे को मंजूरी दी गई।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
बेअदबी विरोधी बिल को भगवंत मान कैबिनेट को मंजूरी, फोटो: सोशल मीडिया
पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी विरोधी कानून को भगवंत मान कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अब बेअदबी से जुड़े मामलों के खिलाफ सजा का प्रावधान करने वाले कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसका नाम The Punjab Prevention of Offences Against Holy Scripture Act, 2025 रखा गया है। सरकार की ओर से प्रस्तावित कानून के तहत किसी भी धर्म के पवित्र ग्रंथों की बेअदबी एक गैर-जमानती अपराध होगा।
इसमें दोषी को कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा दी जा सकेगी। यदि इस बेअदबी से सांप्रदायिक तनाव, दंगे, मौत या संपत्ति का नुकसान होता है, तो दोषी को उम्रकैद के साथ-साथ 20 लाख रुपये तक का जुर्माना भी भरना होगा। इसके अलावा, बेअदबी की कोशिश या षड्यंत्र रचने पर भी 3 से 5 साल तक की सजा दी जा सकती है। अगर दोषी कोई नाबालिग, दिव्यांग या मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति हो, तो उसके अभिभावक या देखरेख करने वाले जिम्मेदार माने जाएंगे।
धर्मगुरुओं पर भी लागू होगा कानून
कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई पंजीकृत धार्मिक नेता जैसे पंडित, मौलवी, ग्रंथी, रागी आदि इस तरह के अपराध में लिप्त पाए जाते हैं तो उन्हें भी कठोरतम सजा दिए जाने का प्रावधान है जाएगी। इसके अलावा, ऐसे दोषियों को सजा के दौरान किसी तरह की पैरोल या राहत नहीं दी जाएगी।
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विधायी प्रक्रिया की तैयारी
कैबिनेट की ओर से मंजूर किए गए ड्राफ्ट को अब विशेष सत्र में पंजाब विधानसभा में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि कानून को पारित कराने से पहले सभी धार्मिक, सामाजिक और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसमें मृत्युदंड का प्रावधान नहीं रखा गया है, क्योंकि वह इसे ‘अत्यधिक’ मानते हैं।
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पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी काफी संवेदनशील मुद्दा रहा है। साल 2015 में फरीदकोट के बरगाड़ी और बेहबल कलां में हुई घटनाओं के बाद से इस पर लगातार बहस चल रही है। अब सरकार का दावा है कि यह नया कानून न सिर्फ सख्त है बल्कि संविधान के अनुरूप भी है। इसके लागू होने के बाद पंजाब में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने में मदद मिल सकेगी।
