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‘हमारी चुप्पी को कमजोरी न समझें’, BCI अध्यक्ष ने CJI को दी खुली चेतावनी, बार और बेंच में क्यों छिड़ी नई जंग?

Bar vs Bench: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने केरल हाई कोर्ट के एक जज द्वारा राज्य बार काउंसिल चुनावों के बारे में की गई मौखिक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। इसके लिए CJI को पत्र लिखकर चेतावनी भी दी है।

  • Written By: अभिषेक सिंह
Updated On: Jan 26, 2026 | 09:56 PM

CJI सूर्यकांत व मनन कुमार मिश्रा (सोर्स- सोशल मीडिया)

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BCI Letter to CJI: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने केरल हाई कोर्ट के एक जज द्वारा राज्य बार काउंसिल चुनावों के बारे में की गई मौखिक टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। BCI ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को एक पत्र लिखकर हाई कोर्ट के जज की टिप्पणियों को ‘बेबुनियाद और लापरवाह’ बताया है।

26 जनवरी को लिखे पत्र में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां बार और बेंच के बीच संवैधानिक संतुलन को बिगाड़ती हैं। उन्होंने संस्थागत टकराव की चेतावनी दी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया।

क्यों और कहां से शुरू हुआ यह विवाद?

यह विवाद केरल बार काउंसिल चुनावों के लिए 1.25 लाख रुपये की नॉमिनेशन फीस को चुनौती देने वाली एक याचिका से शुरू हुआ। केरल हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिका की सुनवाई के दौरान कुछ मौखिक टिप्पणियां कीं। BCI ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कि हाई कोर्ट या अन्य अदालतें चुनाव प्रक्रिया के दौरान याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर सकतीं, लेकिन हाई कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया।

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पत्र में मनन कुमार मिश्रा ने क्या लिखा?

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को लिखे अपने पत्र में मनन कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया अक्सर न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए न्यायिक प्रणाली के कुछ हिस्सों में ‘अति और कमियों’ पर जानबूझकर चुप्पी बनाए रखता है।

‘संयम और चुप्पी को कमजोरी न समझें’

पत्र में आगे उन्होंने कड़े शब्दों में कहा लिखा, ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया पर लगाए गए आरोप और व्यापक टिप्पणियां यह धारणा बनाती हैं कि बार द्वारा दिखाया गया संयम उसकी कमजोरी समझा जा रहा है। यह बार और बेंच के बीच आपसी सम्मान को संस्थागत टकराव में बदल सकता है।

चुनाव ढांचे का हिस्सा है नॉमिनेशन फीस

पत्र में बताया गया कि 1.25 लाख रुपये की नॉमिनेशन फीस चुनाव ढांचे का हिस्सा है जिसे पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया था और उसने इसे मंजूरी दी थी। BCI ने तर्क दिया कि चूंकि यह क्षेत्र पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के दायरे में आता है इसलिए हाई कोर्ट द्वारा चुनौती पर विचार करना पूरी तरह से ‘अनुचित’ था।

‘BCI को नहीं मिलता फीस का हिस्सा’

फंड को लेकर उठाए जा रहे सवालों और आशंकाओं को दूर करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि नॉमिनेशन फीस से जमा की गई पूरी राशि संबंधित राज्य बार काउंसिल के पास रहती है और BCI को इसका कोई हिस्सा नहीं मिलता है।

चुनाव कराने में होता है काफी खर्चा

मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार चुनाव कराने में काफी खर्च होता है। पूर्व हाई कोर्ट जजों की अध्यक्षता वाली ‘उच्च-शक्ति वाली चुनाव समितियों’ और ‘पर्यवेक्षी समिति’ के यात्रा, आवास और मानदेय पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें: Explainer: पॉलिटिकल स्टंट या सवर्णों का सवाल…UGC के नए नियमों पर क्यों मचा बवाल? यहां मिलेगा हर सवाल का जवाब

पत्र में जोर देकर कहा गया कि इस मकसद के लिए कोई सरकारी या बाहरी वित्तीय सहायता नहीं दी जाती है। यह पूरी तरह से वकीलों के समुदाय के योगदान से फंडेड है। वकीलों की सर्वोच्च संस्था की छवि खराब करने से पहले इस बुनियादी सच्चाई को समझना जरूरी है।

CJI को BCI ने दी खुली चेतावनी

BCI ने चीफ जस्टिस से इस मामले में उचित सलाह या निर्देश जारी करने का अनुरोध किया ताकि चुनाव से जुड़े मुद्दे सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित सिस्टम तक ही सीमित रहें। पत्र के आखिर में चेतावनी दी गई कि अगर इस तरह के ‘अनुचित हमले’ जारी रहते हैं, तो वकीलों के एसोसिएशन को सामूहिक कानूनी विरोध और आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

Bci president manan mishra warns cji suryakant silence is not weakness bar bench conflict

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Published On: Jan 26, 2026 | 09:56 PM

Topics:  

  • Bar Council of India
  • CJI Surya Kant
  • Legal News

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