नाम था रामकृष्ण यादव, पहचान बनी बाबा रामदेव; जानिए सफलता और संघर्ष से जुड़ी योग गुरु की कहानी
Baba Ramdev Birthday: योग को जन-जन तक पहुंचाने वाले बाबा रामदेव आज अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। जानिए संन्यास से लेकर पतंजलि जैसे विशाल आयुर्वेदिक ब्रांड की स्थापना तक उनकी यात्रा प्रेरणा और...
- Written By: अमन उपाध्याय
बाबा रामदेव, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
Yoga Guru Baba Ramdev Birthday: योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव आज अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 25 जनवरी 1965 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। बचपन में उनका नाम रामकृष्ण यादव था। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर बाबा रामदेव ने योग और आयुर्वेद के माध्यम से देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
बाबा रामदेव ने बहुत कम उम्र में संन्यास का मार्ग अपनाया और योग को जीवन का लक्ष्य बनाया। उन्होंने हरिद्वार में स्थित पतंजलि योगपीठ को अपनी साधना और सेवा का केंद्र बनाया। वर्ष 2000 के बाद दूरदर्शन पर प्रसारित योग कार्यक्रमों ने उन्हें घर-घर तक पहुंचा दिया। करोड़ों लोगों ने उनके योगासन और प्राणायाम को अपनाया जिससे योग एक जनआंदोलन बन गया।
स्वदेशी और आयुर्वेद को बढ़ावा
योग के साथ-साथ बाबा रामदेव ने स्वदेशी और आयुर्वेद को भी बढ़ावा दिया। आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर उन्होंने पतंजलि आयुर्वेद की स्थापना की, जो आज देश की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक और FMCG कंपनियों में से एक है। पतंजलि ने न सिर्फ आयुर्वेदिक दवाओं को लोकप्रिय बनाया, बल्कि स्वदेशी उत्पादों के जरिए विदेशी कंपनियों को कड़ी चुनौती दी।
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हालांकि, बाबा रामदेव का सफर विवादों से अछूता नहीं रहा। उनके राजनीतिक बयानों, आंदोलनकारी भूमिका और कुछ उत्पादों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद, उनके समर्थकों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। उन्हें आज भी करोड़ों लोग योग गुरु, समाज सुधारक और स्वदेशी आंदोलन के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
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आयुर्वेदिक उपायों से बटोरी सुर्खियां
कोरोना महामारी के दौरान बाबा रामदेव और पतंजलि द्वारा पेश किए गए आयुर्वेदिक उपायों ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं। वहीं, उनके योग शिविर और स्वास्थ्य से जुड़े संदेश आज भी युवाओं और बुजुर्गों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं। अपने जन्मदिन के मौके पर बाबा रामदेव योग, स्वास्थ्य और राष्ट्रहित के संदेश देते रहे हैं। उनके जीवन की कहानी आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो साधारण शुरुआत से असाधारण मुकाम तक पहुंचने का सपना देखते हैं।
उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने योग और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उनके लिए यह सिर्फ उम्र का पड़ाव नहीं बल्कि उस विचारधारा की यात्रा है जिसने योग, स्वास्थ्य और स्वदेशी को करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बनाया।
