अटारी-वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी में हुआ बड़ा फेरबदल, अब साढ़े 6 बजे नहीं, इस समय होगा आयोजन

Retreat Ceremony Time Change: भारत-पाकिस्तान सीमा पर रोज आयोजित होने वाली अटारी-वाघा बॉर्डर रिट्रीट सेरेमनी में बड़ा बदलाव हुआ है। बीएसएफ ने जानकारी दी है कि इसका समय चेंज किया गया है।
Attari-Wagah Border Retreat Ceremony time Change
अटारी-वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी के दौरान दोनों देशों के जवान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Attari-Wagah Border Retreat Ceremony: भारत-पाकिस्तान सीमा पर रोज आयोजित होने वाली अटारी-वाघा बॉर्डर रिट्रीट सेरेमनी होती है। अब इसमें कुछ बदलाव होंगे। बाॅर्डर पर आयोजित होने वाली रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव किया गया है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने जानकारी देते हुए बताया कि 15 अगस्त के बाद से इसका समय बदल जाएगा।

पहले यह सेरेमनी शाम साढ़े 6 बजे शुरू होकर 7 बजे तक चलती थी। लेकिन, अब बीएसएफ ने मौसम में आई तब्दीली को देखते हुए समय में यह परिवर्तन किया है। बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला बदलते मौसम और जल्दी दिन ढलने के कारण लिया गया है। अब सेरेमनी में शामिल होने आने वाले पर्यटकों को भी अधिक सुविधा होगी।

6 बजे शुरू होगी सेरेमनी

बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि अब यह साढ़े 6 बजे के बजाय 6 बजे शुरू होगी। सेरेमनी का नया समय शाम 6:00 बजे से 6:30 बजे तक रहेगा। इससे लोगों को सुविधा होगी। रिट्रीट सेरेमनी देशभक्ति से ओत-प्रोत माहौल और आकर्षक सैन्य प्रदर्शन के कारण हमेशा से ही पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण रही है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर होने वाला यह आयोजन हर दिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को आकर्षित करता है।

1959 से रोज होती है रिट्रीट सेरेमनी

बता दें कि पंजाब के अमृतसर के पास अटारी-वाघा बॉर्डर पर होने वाली यह रिट्रीट सेरेमनी दोनों देशों की सीमा पर 1959 से होने वाला एक अनूठा और उत्साहपूर्ण सैन्य समारोह है, जिसमें राष्ट्रीय झंडे उतारने की प्रक्रिया शामिल होती है।

सैनिकों की जोशीली परेड आकर्षक का केंद्र

दोनों देशों के सैनिकों की जोशीली परेड के कारण यह सेरेमनी विश्वभर में मशहूर है। अटारी-वाघा जॉइंट चेक पोस्ट अमृतसर से लगभग 30 किमी और पाकिस्तान के लाहौर से 22 किमी दूर है, जहां करीब 25,000 दर्शक बीटिंग रिट्रीट समारोह को देखने आते हैं।

'बीटिंग द रिट्रीट' को भारत के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पाकिस्तान रेंजर्स बखूबी निभाते हैं। जैसे ही सूरज ढलने लगता है, यह भारतीय और पाकिस्तानी सैनिकों की जोशीली परेड के साथ शुरू होती है, जिसका समापन राष्ट्रीय ध्वजों को एक साथ नीचे उतारने के साथ होता है।

जैसे ही शाम ढलती है, लोहे के गेट खुल जाते हैं और झंडे एक साथ नीचे उतर आते हैं। झंडे फहराने के बाद, सैनिकों के बीच हाथ मिलाने का एक संक्षिप्त आदान-प्रदान समारोह के समापन का संकेत देता है, जिसके साथ द्वार बंद हो जाते हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com