ऑपरेशन सिंदूर के बीच अमेरिका ने दिया दगा, भारत आ रहे अपाचे हेलिकॉप्टर आधे रास्ते वापस लौट गए

Apache AH-64E Helicopter: अमेरिका ने फिर भारत के साथ दगाबाजी की है। उसने AH-64Eअपाचे गार्जियन अटैक हेलिकॉप्टर की डिलीवरी तय समय पर नहीं दी। इन हेलिकॉप्टरों को जोधपुर बेस में तैनात किया है।
Apache helicopters coming to India turned back midway
AH-64Eअपाचे गार्जियन अटैक हेलिकॉप्टर। इमेज-सोशल मीडिया।
Published on
Updated on

Indian Army News: पाकिस्तान के साथ जारी ऑपरेशन सिंदूर के बीच अमेरिका ने 3 AH-64E अपाचे गार्जियन अटैक हेलिकॉप्टर की डिलीवरी कैंसिल कर दी है। डिलीवरी के तय समय पर ये हेलिकॉप्टर से अमेरिका से उड़ान भी भरे, लेकिन आधे रास्ते से वापस चले गए। ब्रिटेन में कुछ समय रुकने के बाद अपाचे हेलिकॉप्टर के साथ एंटोनोव एयरलाइंस का AN-124 मालवाहक विमान अमेरिका वापस लौट आया। बोइंग के एक प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी द वॉर जोन को बताया कि विमानन कंपनी उन लॉजिस्टिक समस्याओं पर विचार कर रही, जिनके कारण अपाचे की डिलीवरी में बाधा आई है। बता दें कि जेट इंजन, हथियार और तकनीक मामले में अमेरिका कभी भारत के प्रति भरोसेमंद नहीं रहा। वह पहले भी जेट इंजन तय समय पर देने में आनाकानी करता रहा है। इससे इंडियन आर्मी को फाइटर जेट की आपूर्ति नहीं हो पा रही।

जर्मन एयरपोर्ट से कार्गो ने भरी थी उड़ान

अप्रत्याशित गतिविधियों पर विमानन निगरानी एजेंसी कीवास्पॉटर ने देखा कि भारी-भरकम An-124 सीरियल UR-82008 विमान 30 अक्टूबर को जर्मनी के लीपजिग स्थित संचालन केंद्र से उड़ान भरकर अमेरिका के एरिजोना के मेसा गेटवे एयरपोर्ट पर पहुंचा। उसे फीनिक्स-मेसा हवाई अड्डे के रूप में भी जाना जाता है। द वॉर जोन के अनुसार, मेसा स्थित बोइंग के नजदीकी संयंत्र से ले जाए जाने के बाद अपाचे हेलीकॉप्टरों को An-124 पर लोड किया गया, जिसने 1 नवंबर को अमेरिका से रवाना होकर इंग्लैंड के ईस्ट मिडलैंड्स एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी। लादने के दौरान हेलिकॉप्टरों को पहले से भारतीय सेना के विशिष्ट रेगिस्तानी रंग में रंगा गया था। इसके बाद An-124 और उस पर लदे अपाचे ब्रिटिश एयरपोर्ट पर 8 दिन रुके। उसके बाद कार्गो विमान ने भारत की तरफ रुख नहीं किया। वह अटलांटिक महासागर के ऊपर से वापस होते हुए 8 नवंबर को मेसा गेटवे एयरपोर्ट पर लौट आया।

हेलिकॉप्टरों के रोटर उतार लिए गए

द वॉर जोन की रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरपोर्ट पर बाद में अपाचे को उतारते हुए देखा गया। उन्हें खींचकर ले जाया गया। उनके रोटर निकाल लिए गए। इस रोटरक्राफ्ट की पहले 3 बैच एएन-124 विमान द्वारा हिंडन वायुसेना स्टेशन तक पहुंचाई गई थी। बता दें, हेलिकॉप्टर का रोटर उसकी घूमने वाली विंग प्रणाली होती है। उसमें एक मस्तूल, हब और एयरफाइल के आकार के ब्लेड होते हैं। ये उड़ान के लिए जरूरी लिफ्ट और थ्रस्ट पैदा करते हैं। ये रोटर विमान को ऊपर उठाने का काम करते हैं।

तुर्की ने कार्गो नहीं गुजरने दिया

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि An-124 विमान अमेरिका लौटने से पहले एक हफ्ते इंग्लैंड में फंसा रहा। दरअसल, तुर्की ने AH-64E अपाचे को ले जा रहे मालवाहक विमान के लिए हवाई क्षेत्र की मंजूरी नहीं दी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और अक्सर कश्मीर पर पाकिस्तान का पक्ष लेने से भारत और तुर्की के संबंध खराब हो गए हैं। पाकिस्तान के जनरल असीम मुनीर का बार-बार अमेरिका दौरा होता रहा है। इससे भी माना जा रहा कि अमेरिका इन हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति समय पर करने में आनाकानी कर रहा।

जोधपुर बेस पर तैनात होंगे अपाचे

इन AH-64 अपाचे को नासिक स्थित भारतीय सेना विमानन प्रशिक्षण विद्यालय ले जाया जाएगा। वहां पायलटों को इसे उड़ाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उसके बाद इन अपाचे हेलीकॉप्टरों को जोधपुर के उत्तर स्थित नागतलाओ सेना विमानन अड्डे पर तैनात किए जाने की उम्मीद है। वायुसेना के पास पहले से 22 अपाचे हेलिकॉप्‍टर हैं। ये पठानकोट और असम के जोरहाट एयर बेस पर तैनात हैं।

2020 में हुई थी 6 अपाचे की देने की डील

भारत और अमेरिका के बीच 2020 में भारतीय सेना को 6 अपाचे हेलिकॉप्टर देने की डील हुई थी। अमेरिका ने इन टैंक किलरों का पहला बैच देने में काफी देरी कर दी थी। 2024 में मिलने वाला ऑर्डर जुलाई 2025 में मिला। नवंबर में इस डील का दूसरा और आखिरी बैच डिलीवर होना था,जो वापस अमेरिका लौट चुका है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com