Massive Attack On Iran: अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई से दुनिया में खलबली, सामने आई तमाम देशों की प्रतिक्रिया

US Israel Attacks Iran: 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों ने दुनिया को हिला दिया है। भारत ने शांति की अपील की है, जबकि रूस-चीन ने हमले की निंदा और ऑस्ट्रेलिया-कनाडा ने समर्थन किया है।
Iran Attack: US-Israel Strike Sparks Global Alarm, India Calls for Urgent Diplomacy
अमेरिका-इजरायल के ईरान हमलों पर विश्व नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Global Reaction To Iran Strike: शनिवार 28 फरवरी 2026 पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता की खबर लेकर आई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमला बोल दिया। इन हमलों के तुरंत बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है और वैश्विक नेताओं ने इस पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है। भारत ने इस गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों देशों के नेताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है। पूरे विश्व में इस समय युद्ध की आशंका गहरा गई है क्योंकि इस सैन्य कार्रवाई का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

विश्व नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

यूरोपीय देशों ने इस भीषण हमले के बाद एक आपात बैठक बुलाने का निर्णय लिया है ताकि स्थिति को और बिगड़ने से समय रहते रोका जा सके। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरानी हमलों की निंदा की लेकिन सीधे तौर पर इस सैन्य कार्रवाई का हिस्सा होने से इनकार कर दिया। वहीं रूस और चीन ने इसे बिना किसी उकसावे की सशस्त्र आक्रामकता करार देते हुए अमेरिका और इजरायल की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।

भारत की कूटनीतिक पहल

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार की शाम को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार से फोन पर बात की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि भारत ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने के लिए कूटनीति और बातचीत का रास्ता चुनने की अपील दोहराई है। भारत की सबसे बड़ी चिंता ईरान में रह रहे अपने नागरिकों और छात्रों की सुरक्षा को लेकर है जो इस समय युद्ध के डर के बीच वहां फंसे हुए हैं।

यात्रा और व्यापार पर संकट

इस सैन्य हमले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर पड़ा है और दुनिया का सबसे व्यस्त दुबई एयरपोर्ट पूरी तरह से अव्यवस्था का शिकार हो गया है। भारत के अमृतसर और चंडीगढ़ जैसे शहरों से दुबई जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं जिससे हजारों यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। विमानों के रद्द होने से भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु और बॉलीवुड अभिनेत्री सोनल चौहान भी विदेशों में फंस गई हैं और सुरक्षित घर वापसी की गुहार लगा रही हैं।

पश्चिमी गठबंधन में समर्थन और दुविधा

ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने अमेरिका के इस कदम का खुला समर्थन किया है क्योंकि वे ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोकना चाहते हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि ईरान मध्य पूर्व में अस्थिरता का मुख्य स्रोत है और उसकी सैन्य ताकत को नियंत्रित करना वैश्विक शांति के लिए जरूरी है। दूसरी ओर कई यूरोपीय सहयोगी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस एकतरफा कार्रवाई से दुविधा में हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इससे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होगा।

परमाणु हथियारों का बढ़ता खतरा

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संगठन 'आईकैन' (ICAN) ने इन हमलों की तीखी आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना और विनाशकारी कार्रवाई बताया है। संगठन की निदेशक मेलिसा पार्के ने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों से न केवल क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा बल्कि परमाणु हथियारों के प्रसार का खतरा भी और गहरा हो जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री ने इन हमलों से पहले ही कह दिया था कि उनका देश युद्ध और शांति दोनों के लिए पूरी तरह तैयार है जिससे तनाव और बढ़ गया है।

भविष्य की अनिश्चितता और शांति

नॉर्वे के विदेश मंत्री ने आशंका जताई है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल नहीं हुई तो आने वाले समय में एक नया महायुद्ध छिड़ सकता है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है ताकि इस संकट का कोई कूटनीतिक हल निकाला जा सके। आने वाले कुछ हफ्ते वैश्विक राजनीति के लिए निर्णायक साबित होंगे क्योंकि पूरी दुनिया अब शांति की उम्मीद में कूटनीतिक रास्तों की ओर बड़ी उम्मीद से देख रही है।

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