जब भिखारी बनकर डोभाल ने नाकाम की थी ना’पाक चाल, पाकिस्तान में अजीत का ‘अजेय मिशन’, पढ़ें पूरी कहानी
NSA Ajit Doval: बात उस समय की है जब पाकिस्तान एक खौफनाक प्लान बना रहा था। भारत इस मामले में तनिक भी कोताही बरतना नहीं चाहता था। यही वजह है कि सुपर कॉप कहे जाने वाले अजीत डोभाल को यह मिशन सौंपा गया।
- Written By: अभिषेक सिंह
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (डिजाइन फोटो)
Ajit Doval Mission in Pakistan: केन्द्र सरकार ने रविवार को अनीश दयाल सिंह को डिप्टी एनएसए नियुक्त किया है। जिसके बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के रिटायरमेंट की अटकलें लगाई जा रही हैं। दूसरी तरफ उनकी उम्र भी 80 वर्ष से ऊपर हो चुकी है। इन अटकलबाजियों के बीच उनकी स्पाई लाइफ से जुड़ी कहानियों में भी दिलचस्पी ले रहे हैं।
आपको बता दें कि 1980 के दशक की शुरुआत में भारतीय खुफिया एजेंट अजीत डोभाल को इंटेलिजेंस ब्यूरो और सिक्किम मिशन में मिली सफलताओं के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की राजधानी में एक महत्वपूर्ण कार्यभार सौंपा गया। इस मिशन में बहुत कुछ दांव पर लगा था, एक भी चूक उनकी जान ले सकती थी और भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती थी।
पाकिस्तान का ख़तरनाक प्लान
डी देवदत्त ने अपनी किताब ‘अजीत डोभाल- एक मिशन पर’, में लिखा है कि पाकिस्तान किसी भी तरह से परमाणु हथियार हासिल करने के लिए दृढ़ था। भारत ने 1974 में अपने पहले सफल परमाणु परीक्षण से दुनिया को चौंका दिया था। जिसके बाद जिससे चीन और उत्तर कोरिया के समर्थन से पाकिस्तान में भी परमाणु क्षमताओं की खोज शुरू हो चुकी थी।
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अजीत डोभाल को मिली कमान
भारत को इस रहस्य को दुनिया के सामने उजागर करना था। भारत इस मामले में तनिक भी कोताही बरतना नहीं चाहता था। यही वजह है कि सुपर कॉप कहे जाने वाले अजीत डोभाल को यह मिशन सौंपा गया। जिसके बाद क्या कुछ हुआ यह कहानी हम आपको बताते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (सोर्स- सोशल मीडिया)
किताब के मुताबिक डोभाल का उद्देश्य इस्लामाबाद के पास कहुटा गांव में खान अनुसंधान केंद्र था, जो दिखने में भले ही एक साधारण गांव था, लेकिन पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का एक कड़ी सुरक्षा वाला केंद्र था। डोभाल अपने मिशन की गंभीरता को समझते थे।
भिखारी बन कर दिया कमाल
यहां से सबूत न मिलने पर पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति के रूप में उभर सकता था। ऐसे में अजित डोभाल के पास सबसे बड़ी चुनौती केंद्र की कड़ी सुरक्षा को भेदने की थी। लेकिन डोभाल ने भी हार मानना या पीछे हटना नहीं सीखा था। उन्होंने बड़ी चतुराई से खुद को एक भिखारी का भेष धारण कर लिया।
भारत भेजे वैज्ञानिकों के बाल
कई दिनों तक डोभाल कहुटा की गलियों में भिखारी के वेश में घूमते रहे। राहगीर उन्हें भीख देते रहे, इस बात से अनजान कि उनकी पैनी नजरें हर गतिविधि पर हैं। एक दिन उनका ध्यान एक छोटी सी नाई की दुकान पर गया, जहां खान अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक रोजाना आते थे। किताब में बताया गया है कि डोभाल किसी भी आम भिखारी की तरह बाहर बैठे थे, लेकिन उनका असली ध्यान अंदर फर्श पर बिखरे बालों पर था।
यह भी पढ़ें: रिटायर होने वाले हैं अजीत डोभाल? अनीश दयाल सिंह बने डिप्टी एनएसए
किताब के मुताबिक डोभाल ने चुपचाप बाल इकट्ठा किए और उन्हें भारत भेज दिया। परीक्षणों में विकिरण और यूरेनियम के अंश मिले, जिससे पाकिस्तान के गुप्त परमाणु कार्यक्रम की पुष्टि हुई। इस एक कदम से उन्होंने पाकिस्तान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं का खाका उजागर कर दिया।
जोखिम में जान, सुरक्षित हिंदुस्तान
छह साल तक पाकिस्तान में गुप्त रूप से रहने के दौरान डोभाल को लगातार खतरों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके प्रयासों से भारतीय खुफिया एजेंसियों को पाकिस्तान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं की पूरी तस्वीर साफ हुई और भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
