वायु प्रदूषण से हर साल 3 लाख से अधिक गर्भपात हो रहे, समय से पहले डिलीवरी का जोखिम भी 70% बढ़ा
Side Effects of Air Pollution: प्रदूषित हवा लेने से गर्भवतियों और उसके बच्चे के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। समय से पहले जन्म और गर्भपात की संख्या लगातार बढ़ रही है।
- Written By: रंजन कुमार
वायु प्रदूषण के बीच गर्भवती महिला। प्रतीकात्मक। इमेज-एआई
Air Pollution Poses a Threat to Pregnant Women and Children: वायु प्रदूषण का गर्भवती महिलाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा। उनके बच्चे की सेहत पर भी सीधे दुष्प्रभाव पड़ता है। लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार भारत और दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण के उच्च स्तर से गर्भपात और समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ता जा रहा है। हर साल तीन लाख से अधिक गर्भपात प्रदूषण के कारण हो रहे।
बढ़ते प्रदूषण की वजह से जन्म के समय बच्चे का वजन कम रह जाता हैं। हाल में आईआईटी दिल्ली और अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (मुंबई) ने ब्रिटेन और आयरलैंड के संस्थानों के साथ मिलकर इस विषय पर अध्ययन किया है। इसमें पाया गया कि गर्भावस्था में पीएम 2.5 के अधिक संपर्क में आने से समय से पहले डिलीवरी का जोखिम 70 प्रतिशत बढ़ता है। जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने का जोखिम 40 प्रतिशत तक अधिक होता है। जो बच्चे प्रदूषित हवा में पलते हैं, उनके विकास में रुकावट आती है। बच्चों को सांस की परेशानी, एनीमिया और दिल की बीमारी होने की आशंका रहती है।
इन राज्यों में खतरनाक स्तर पर वायु प्रदूषण
बिहार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा में पीएम 2.5 प्रदूषकों का स्तर बहुत ज्यादा है। देश के दक्षिण और पूर्वोत्तर हिस्सों में यह कम है। इस कारण उत्तर भारत के राज्यों में समय से पहले जन्म के मामलों की संख्या अधिक है। हिमाचल प्रदेश में 39 प्रतिशत, उत्तराखंड में 27 प्रतिशत, राजस्थान में 18 प्रतिशत, दिल्ली में 17 प्रतिशत बच्चों का जन्म समय से पहले हुआ है। पंजाब में जन्म के समय सबसे ज्यादा बच्चों का वजन औसत से कम था।
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क्या होता है पीएम 2.5?
हवा में धूल हमें दिखती है, मगर पीएम 2.5 छोटे होते हैं। पीएम का मतलब होता है-पार्टिकुलेट मैटर और 2.5 का अर्थ 2.5 माइक्रोन। यह उसका आकार बताता है। ये इतने बारीक होते हैं कि आंखों से नहीं दिखाई देते। ये इंसानी बाल की मोटाई से 30 गुना छोटे होते हैं। फैक्ट्रियों और गाड़ियों के धुंए, लकड़ी, कचरा या पराली जलाने से ये कण हवा में फैलते हैं। सांस लेने के साथ ये शरीर में घुसते हैं। फेफड़ों तक पहुंचते और खून में भी मिल सकते हैं। इससे सांस की परेशानी, दिल की बीमारी, स्ट्रोक और बच्चों के विकास में दिक्कत आदि समस्याएं हो सकती हैं।
बच्चे का जन्म 37 हफ्ते तक पहले होने की आशंका
आईआईटी दिल्ली के शोध में पता चला कि गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में प्रदूषण के संपर्क में आने से बच्चे का वजन कम हो सकता है। पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ओजोन के अधिक स्तर से बच्चे का जन्म 37 हफ्ते तक पहले हो सकता है। बता दें, प्रदूषण का असर मां से ज्यादा बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है। सांस लेते समय ये गंदी हवा गर्भवती के शरीर में जाती है, जिससे ये कण फेफड़ों से होकर खून में पहुंचते हैं। गर्भ में पल रहे बच्चे को बढ़ने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन चाहिए होती है। ये प्रदूषक खून में ऑक्सीजन की मात्रा घटा देते हैं। ऑक्सीजन की कमी से बच्चे का विकास रुक सकता है।
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गर्भवतियों के लिए ड्रग्स या सिगरेट से ज्यादा नुकसानदेह प्रदूषण
नई दिल्ली के बीएलके मैक्स अस्पताल में स्त्री रोग विभाग की निदेशक डॉ. तृप्ति शरण का कहना है कि डॉक्टर, गर्भवतियों को ड्रग्स या सिगरेट ना लेने की सलाह देते हैं। मगर, प्रदूषण इससे भी ज्यादा हानिकारक हो सकता है। प्रदूषक, हवा के रास्ते सीधे शरीर में जाते हैं। ये मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचाता है। प्लेसेंटा मां और बच्चे के बीच कनेक्शन होता है। इसके जरिए ऑक्सीजन और पोषण बच्चे तक पहुंचता है, जिससे बच्चा सही ढंग से बढ़ सके। पीएम 2.5 जैसे प्रदूषित कण प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक पहुंचते हैं। प्लेसेंटा को भी नुकसान होता है। प्लेसेंटा के ठीक से काम न करने पर बच्चे को जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिलते। मां का गर्भाशय जल्दी सिकुड़ने लगता है, उससे बच्चे का जन्म समय से पहले हो जाता है।
