‘खतरनाक’ है AI का शॉर्टकट? ग्लोबल इंपैक्ट समिट के बीच SC की सख्त टिप्पणी, CJI सूर्यकांत ने किसे दी चेतावनी?
CJI Suryakant: एक तरफ राजधानी दिल्ली स्थिति भारत मंडपम में ग्लोबल AI इंपैक्ट समिट चल रही है। दूसरी तरफ भारत मंडपम से कुछ ही दूर स्थित देश की सर्वोच्च अदालत ने इसके इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है।
- Written By: अभिषेक सिंह
सीजेआई सूर्यकांत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court on AI: एक तरफ राजधानी दिल्ली स्थिति भारत मंडपम में ग्लोबल AI इंपैक्ट समिट चल रही है। विकास को स्पीड-अप करने के लिए AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात हो रही है। वहीं, दूसरी तरफ भारत मंडपम से कुछ ही दूर स्थित देश की सर्वोच्च अदालत ने इसके इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है।
सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाओं के ड्राफ्ट तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे एक ‘खतरनाक ट्रेंड’ बताया है। उन्होंने कहा कि अदालत को ऐसी जानकारी दी गई है जो चौंकाने वाली है।
CJI सूर्यकांत ने क्यों जताई चिंता?
सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कुछ वकील अब पिटीशन और दलीलें ड्राफ्ट करने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। AI इस्तेमाल का परिणाम यह हो रहा है कि कोर्ट को ऐसे फैसलों और उदाहरणों का हवाला दिया जा रहा है, जो वास्तव में हैं ही नहीं।
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सीजेआई की बेंच ने दिए उदाहरण
बेंच में शामिल जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पिटीशन में ‘मर्सी बनाम मैनकाइंड’ नाम के एक केस का जिक्र किया गया था, लेकिन ऐसा कोई केस है ही नहीं। CJI सूर्यकांत ने आगे कहा कि ऐसा ही एक केस जस्टिस दीपांकर दत्ता के सामने आया था, जहां दिए गए उदाहरण भी गलत थे।
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जस्टिस नागरत्ना ने यह भी साफ किया कि कुछ मामलों में वकील सुप्रीम कोर्ट के असली केस का जिक्र कर रहे हैं। लेकिन जिन पैराग्राफ या नतीजों का जिक्र किया गया है वे असली जजमेंट में नहीं हैं। सुप्रीम अदालत ने साफ इशारा किया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को गंभीर प्रोफेशनल फॉल्ट माना जा सकता है।
‘ख़तरनाक ट्रेंड है AI का इस्तेमाल’
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि AI से बने तथ्यहीन और भ्रामक ड्राफ्ट्स न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह कर सकते हैं और न्याय की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस ट्रेंड को ख़तरनाक बताते हुए कहा कि वकीलों की जिम्मेदारी है कि वे कोर्ट में पेश की गई हर दलील को खुद वेरिफाई करें।
