MP Bhojshala Controversy Latest Update: मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रही कानूनी जंग में सोमवार को एक नया मोड़ आया। वकीलों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण हाई कोर्ट की सुनवाई टालनी पड़ी। अब आगामी 18 फरवरी को यह तय होगा कि मामले की दिशा क्या होगी।
धार के ऐतिहासिक भोजशाला प्रकरण में सोमवार को इंदौर हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी थी। न्यायमूर्ति श्री विजय शुक्ला और श्री आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को रखा जाना था, लेकिन वकीलों की प्रदेश व्यापी हड़ताल की वजह से अदालती कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। इसके बावजूद, दोनों पक्षों के याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तिथि नियत की है।
अब्दुल समद मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से पक्ष रखते हुए अब्दुल समद ने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय (SC) द्वारा दिए गए आदेशों का कड़ाई से पालन किया जाए। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, इस परिसर से जुड़े सभी समान मामलों को एक साथ जोड़कर सुना जाना चाहिए।
दूसरी ओर, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि भोजशाला मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर और राजा भोज द्वारा निर्मित एक प्राचीन गुरुकुल है। हिंदू पक्ष 2024 में हुए 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के परिणामों से पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रहा है।
MP Bhojshala Controversy Latest Update: मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रही कानूनी जंग में सोमवार को एक नया मोड़ आया। वकीलों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण हाई कोर्ट की सुनवाई टालनी पड़ी। अब आगामी 18 फरवरी को यह तय होगा कि मामले की दिशा क्या होगी।
धार के ऐतिहासिक भोजशाला प्रकरण में सोमवार को इंदौर हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी थी। न्यायमूर्ति श्री विजय शुक्ला और श्री आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को रखा जाना था, लेकिन वकीलों की प्रदेश व्यापी हड़ताल की वजह से अदालती कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। इसके बावजूद, दोनों पक्षों के याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तिथि नियत की है।
अब्दुल समद मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से पक्ष रखते हुए अब्दुल समद ने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय (SC) द्वारा दिए गए आदेशों का कड़ाई से पालन किया जाए। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, इस परिसर से जुड़े सभी समान मामलों को एक साथ जोड़कर सुना जाना चाहिए।
दूसरी ओर, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि भोजशाला मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर और राजा भोज द्वारा निर्मित एक प्राचीन गुरुकुल है। हिंदू पक्ष 2024 में हुए 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के परिणामों से पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रहा है।