इससे पहले भी वरदान साबित हो चुकी है 11A सीट, साल 1998 में जिंदा बचा था शख्स, संयोग या करिश्मा?
अहमदाबाद में एयर इंडिया प्लेन क्रैश में 274 लोगों की मौत, केवल विश्वकुमार जीवित बचे। थाई गायक रुआंगसाक ने भी 1998 में इसी सीट 11A पर हादसे से बचने की बात कही।
- Written By: अर्पित शुक्ला
इससे पहले भी वरदान साबित हो चुकी है 11A सीट, साल 1998 में जिंदा बचा था सख्श, संयोग या करिश्मा?
अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के प्लेन क्रैश ने पूरे देश को झकझोर कर रखा दिया है। इस विमान हादसे में 274 लोगों की जान चली गई, जिनमें विमान में सवार 229 यात्री, 12 क्रू मेंबर के अलावा 33 स्थानीय लोग तथा मेडिकल कॉलेज के छात्र भी मारे गए हैं। इस हादसे में केवल एक यात्री विश्वकुमार जिंदा बचा है। विश्वकुमार को आग की लपटों के बीच से जिंदा बचकर निकलते देख सब लोग हैरान थे कि आखिर इस भयानक प्लेन हादसे से बच कैसे गया?
इसी बीच थाईलैंड के एक गायक रुआंगसाक लॉयचुसाक का भी चर्चा में आ गया है। उन्होंने खुलासा किया है कि वो 1998 में हुए एक भीषण विमान हादसे में जिंदा बचे थे, जिसमें 101 लोगों की मौत हो गई थी। हैरानी की बात ये है कि उस हादसे वाले प्लेन में वो भी सीट नंबर 11A पर ही बैठे थे। ये वही सीट नंबर है, जिसपर विश्वकुमार बैठे थे।
लकी सीट नंबर 11A
रुआंगसाक ने बताया कि भारत में हुए विमान हादसे का इकलौता बचा व्यक्ति मेरी ही सीट नंबर 11A पर बैठा था। उन्होंने कहा कि मैं इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खोने वाले सभी लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं।
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रुआंगसाक उस दौरान थाई एयरवेज की फ्लाइट टीजी261 में सवार थे, जो बैंकॉक से सूरत थानी के लिए जा रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लैंडिंग के दौरान विमान दलदल में जा गिरा, जिसमें 132 यात्रियों तथा 14 चालक दल के सदस्यों में से 101 लोगों की जान चली गई थी, वहीं 45 अन्य घायल हुए थे।
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आज भी याद है हादसा
सिंगर ने अहने ‘दूसरे जीवन’ का जिक्र करते हुए कहा, ‘हादसे के बाद 10 साल तक मुझे फ्लाइट में बैठने में दिक्कत हुई। मुझे सांस लेने में भी तकलीफ होती थी, भले ही हवा का संचार सामान्य था। मैं किसी से भी बात करने से बचता था और हमेशा खिड़की के बाहर देखता रहता था, किसी को भी खिड़की बंद करने से रोकता था जिससे मुझे सुरक्षा का अहसास हो।
