
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में गड़बड़ी के बाद चुनाव आयोग का एक्शन (फोटो- सोशल मीडिया)
Election Commission of India FIR for Voter List Scam: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में हुई भारी गड़बड़ी के मामले के बाद अब एक बेहद गंभीर मसला सामने आया है। चुनाव आयोग ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के चार सरकारी अधिकारियों और एक कर्मचारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने का सख्त आदेश जारी किया है। पूर्वी मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना में हुई अनियमितताओं को लेकर आयोग के इस फैसले से पूरे प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। यह कार्रवाई पुराने मामले में बरती गई ढिलाई के बाद की गई है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि चुनाव आयोग अब चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त करने के मूड में कतई नहीं है।
आयोग ने पूर्वी मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि वे मोयना और बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्रों के जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करवाएं। इससे पहले जब राज्य के मुख्य सचिव को इस मसले पर दिल्ली तलब किया गया था, तब इन अधिकारियों को निलंबित तो कर दिया गया था, लेकिन उन पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। अब चुनाव आयोग ने राज्य सरकार या मुख्य सचिव पर निर्भर रहने के बजाय सीधे अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह कदम उठाने के लिए कहा है ताकि दोषियों पर कानून का शिकंजा कसा जा सके।
यह मामला कुछ महीने पहले तब गरमाया था जब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी पाने पर सख्त निर्देश दिए थे। उस समय मुख्य सचिव दिल्ली गए और वहां से लौटने के बाद संबंधित ईआरओ, एईआरओ और डेटा एंट्री ऑपरेटर को सस्पेंड तो कर दिया गया, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई यानी एफआईआर नहीं की गई। इस पर लगातार सवाल उठ रहे थे कि आखिर राज्य प्रशासन ने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाई। आयोग ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वे कार्रवाई के लिए अब राज्य के निर्देशों का इंतजार नहीं करेंगे, बल्कि जिला स्तर पर ही अधिकारियों को जवाबदेह बनाते हुए सख्त एक्शन लिया जाएगा। आयोग ने याद दिलाया है कि स्वतंत्र निष्पक्ष चुनाव के लिए वे अपनी शक्तियों का पूरा उपयोग करेंगे।
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एफआईआर के पीछे की सबसे बड़ी वजह मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी मतदाताओं का शामिल होना है। चुनाव आयोग के पास इस बात की पुख्ता जानकारी थी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से यह बड़ा खुलासा हुआ कि अधिकारियों और डेटा एंट्री ऑपरेटरों ने जानबूझकर फर्जी नाम जोड़े थे। इसी गंभीर आरोप के चलते पहले निलंबन और अब सीधे एफआईआर का आदेश दिया गया है। आयोग का यह कदम बताता है कि चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना होगा कि जिला निर्वाचन अधिकारी इस निर्देश पर कितनी जल्दी अमल करते हैं।






