
नेशनल हैंडराइटिंग डे 2025 (सौजन्य-फ्रीपीक)
नवभारत डेस्क: आज 23 जनवरी है, जिसे नेशनल हैंडराइटिंग डे के रूप में मनाया जाता है। आप सोच रहे है कि नेशनल हैंडराइटिंग डे की क्या ही आवश्यकता है। लेकिन इसकी आवश्यकता है। खास तौर पर आज के जमाने में इसका खास महत्व है।
आज के आधुनिक दौर में कॉलेज के बाद लिखने के लिए कोई भी ज्यादातर पेन या पेंसिल का इस्तेमाल नहीं करता है। मोबाईल, कंप्यूटर, टैबलेट के जमाने में लोग कागज में लिखने से ज्यादा कंप्यूटर या मोबाईल में लिखना पसंद करते है। जिसके कारण लोगों के हाथों से पेन छूटता जा रहा है और लोगों के लिखने की आदत भूलती जा रही है।
आपने देखा होगा कई बार लोग जब हाथों में पेन पकड़ते है तो वे ये तक भूल जाते है कि उन्होंने जो लिखा है वो सही है या नहीं क्योंकि टेक्नोलॉजी ने हमे ऐसा बना दिया है कि ऑटोकरेक्ट के कारण हम खुद उस चीजों को ध्यान में नहीं रखते। इसलिए नेशनल हैंडराइटिंग डे और भी खास और महत्वपूर्ण बन जाता है। ये दिन आपको आधुनित यंत्रों से दूर आपकी अपनी खूबसूरत हैंडराइटिंग की याद दिलाता है।
आपके मन में ये सवाल तो उठा ही होगा कि नेशनल हैंडराइटिंग डे 23 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है। तो इसका जवाब है कि 23 जनवरी को इसलिए चुना गया क्योंकि यह जॉन हैनकॉक का जन्मदिन था। जॉन हैनकॉक वो इंसान है जिसने साल 1776 में स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले पहले अमेरिकी थे। इसलिए उनके ही जन्मदिन को नेशनल हैंडराइटिंग डे के रूप में मनाया जाने लगा।
देश की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
नेशनल हैंडराइटिंग डे की शुरुआत 1977 में हुई थी, जब एक लेखन उपकरण निर्माता संघ ने अपने संगठन का विज्ञापन समारोह आयोजित किया था, तभी से इसकी शुरुआत हुई थी। पहला नेशनल हैंडराइटिंग डे पेन, पेंसिल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया था। हाल ही में इसे हैंडराइटिंग की तनकीक और सुंदरता को बढ़ाने और निखारने के लिए मनाया जाता है। आज कर हैंडराइटिंग में कैलिग्राफी, कर्स्यू राइटिंग काफी प्रचलित हैंडराइटिंग है।






