पीरियड्स के दौरान योग करती महिला (सौ. एआई)
Yoga for Menstrual Cramps: पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द और मूड स्विंग्स अक्सर उनकी पढ़ाई और खेलकूद को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार योग एक ऐसा प्राकृतिक पेनकिलर है जो बिना किसी दुष्प्रभाव के इन समस्याओं को जड़ से मिटा सकता है।
पीरियड्स के दौरान दर्द, ऐंठन और सूजन जैसी चुनौतियों से लगभग हर लड़की को गुजरना पड़ता है। ऐसे में योग न केवल मांसपेशियों को आराम देता है बल्कि शरीर में एंडोर्फिन नामक हार्मोन को सक्रिय करता है जिसे शरीर का प्राकृतिक दर्द निवारक माना जाता है।
यह आसन कमर और पेट की मांसपेशियों के तनाव को कम करता है। घुटनों के बल बैठकर आगे की ओर झुकना और माथा जमीन पर टिकाना, पेल्विक क्षेत्र को राहत पहुंचाता है। जिससे पीरियड्स पेन से राहत मिलती है।
पीठ के बल लेटकर पैरों के तलवों को आपस में जोड़ने से पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। यह ऐंठन और सूजन को कम करने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है।
पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती से लगाने वाली यह मुद्रा पेट की मरोड़ और गैस की समस्या से तुरंत राहत देती है। यह पेट के दबाव को संतुलित कर दर्द कम करती है।
अपानासन (सौ. फ्रीपिक)
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रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने वाला यह आसन कमर दर्द को दूर करता है। सांसों के तालमेल के साथ इसे करने से मूड स्विंग्स भी नियंत्रित होते हैं।
पेट की मांसपेशियों में मरोड़ को कम करने के लिए यह ट्विस्टिंग आसन बेहतरीन है। यह शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और सूजन घटाने में सहायक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स के दौरान बहुत भारी या तेज व्यायाम से बचना चाहिए। योग करते समय शरीर पर बहुत अधिक दबाव न डालें। यदि दर्द असहनीय हो या सूजन बहुत ज्यादा हो तो डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। इन योगासनों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर बेटियां उन 5 दिनों में भी ऊर्जावान और खुश रह सकती हैं।