World Hepatitis Day 2026: प्रेग्नेंसी में हेपेटाइटिस मां और शिशु दोनों के लिए बन सकता है खतरा, जानें जरूरी बात
Hepatitis In Pregnancy: गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस, मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। जानें इसके शुरुआती लक्षण, बचाव के उपाय और प्रेग्नेंसी में समय पर जांच व इलाज क्यों है जरूरी।
- Written By: रीता राय सागर
हेपेटाइटिस डे (फोटो.सोशल मीडिया)
Hepatitis During Pregnancy Risks: हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिसमें वायरल और नॉन वायरल इंफेक्शन के कारण लिवर में सूजन आ जाता है। हेपेटाइटिस के प्रमुख वायरस हेपेटाइटिस A, B, C, D और E हैं। गर्भावस्था के दौरान वायरल हेपेटाइटिस के कारण पीलिया जैसी बीमारी हो सकती है, जबकि नॉन-वायरल हेपेटाइटिस गर्भावस्था से जुड़ी कई अन्य समस्याओं का कारण बनती है।
इसका उपचार, बचाव और गर्भावस्था पर प्रभाव हैपेटाइटिस के प्रकार पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में हेपेटाइटिस गर्भावस्था को जटिल बना सकता है। इससे लिवर को अधिक नुकसान होने का खतरा बढ़ता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस का समय पर इलाज जरूरी है, ताकि मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
गर्भावस्था में हेपेटाइटिस के जोखिम
वायरल हेपेटाइटिस मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसके कारण समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ जाता है। कुछ प्रकार के हेपेटाइटिस संक्रमण अजन्मे शिशु तक भी पहुंच सकते हैं, जिससे कई लॉन्ग टर्म समस्याएं हो सकती हैं।
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गर्भवती महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे गंभीर प्रकार है- हेपेटाइटिस E, हालांकि यह कम पाया जाता है, लेकिन हेपेटाइटिस B और C अधिक सामान्य हैं। हेपेटाइटिस B से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। इसलिए जो महिलाएं गर्भधारण की योजना बना रही हैं, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए।
गर्भावस्था में ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस भी जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि नियमित जांच, डॉक्टर की निगरानी और सही इलाज से स्वस्थ गर्भावस्था और सुरक्षित प्रसव संभव है। बेहतर परिणाम के लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग और समय-समय पर फॉलो-अप जरूरी है।
हेपेटाइटिस डे (फोटो.सोशल मीडिया)
गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस के लक्षण
- मतली और उल्टी
- भूख कम लगना
- त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
- पेशाब का रंग गहरा होना
- त्वचा के नीचे आसानी से नीले निशान या रक्तस्राव होना
इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत अपने गाइनोकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
डिलीवरी के बाद रिकवरी पर असर
यदि महिला को क्रॉनिक हेपेटाइटिस है, तो सामान्य परिस्थितियों में यह प्रसव के बाद रिकवरी को बहुत अधिक प्रभावित नहीं करता। हालांकि यदि प्रसव के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग हुआ हो, तो रिकवरी में अधिक समय लग सकता है।
क्या हेपेटाइटिस में स्तनपान सुरक्षित है?
विशेषज्ञों के अनुसार, वायरल हेपेटाइटिस होने पर भी ज्यादातर मामलों में ब्रेस्ट फीडिंग सुरक्षित माना जाता है और केवल हेपेटाइटिस होने की वजह से इसे रोकने की जरूरत नहीं होती। हालांकि यदि मां के निप्पल टियर हो गए हों या उनमें से खून निकल रहा हो, तो उनके ठीक होने तक स्तनपान नहीं कराना चाहिए।
इसके अलावा, यदि मां को हेपेटाइटिस B है, तो नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार हेपेटाइटिस B इम्यूनोग्लोब्युलिन और हेपेटाइटिस B का टीका लगाया जाना चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा कम से कम हो।
