

Perimenopause Symptoms In Hindi: 40 के उम्र के आसपास की महिलाएं मेनोपॉज के शुरुआती लक्षणों को पहचान ही नहीं पाती है। अधिकांश महिलाएं मेनोपॉज को केवल पीरियड्स का बंद होना समझती हैं, लेकिन इससे पहले पेरीमेनोपॉज दस्तक देता है। यह वह समय है, जो मेनोपॉज से कई साल पहले शुरू हो सकता है और इस दौरान शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं।
पेरीमेनोपॉज के लक्षणों में तनाव, थायरॉइड या थकान जैसी समस्याएं हो सकती है। इसलिए कई महिलाएं इन्हें सामान्य समझकर अनदेखा कर देती हैं। कई महिलाओं को लगता है कि अचानक ज्यादा थकान, मूड में बदलाव या अनियमित पीरियड्स सिर्फ स्ट्रेस की वजह से हैं।
पेरीमेनोपॉज वह अवस्था है, जब ओवरीज धीरे-धीरे एस्ट्रोजिन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का प्रोडक्शन कम कर देता है। यह आमतौर पर महिलाओं में 30 के आखिरी पड़ाव और 40 की शुरुआती उम्र में हो सकता है, हालांकि यह हर महिला में अलग-अलग हो सकती है। यह अवस्था तब तक रहती है, जब तक लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आते है।
पेरीमेनोपॉज का सबसे शुरुआती और सामान्य संकेत मासिक धर्म में बदलाव है। इस दौरान पीरियड्स पहले से छोटे या लंबे हो सकते हैं। ब्लीडिंग ज्यादा या कम होने लगते हैं। हालांकि यह बदलाव सामान्य हो सकते हैं, लेकिन यदि बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, पीरियड्स के बीच रक्तस्राव हो या अचानक बड़े बदलाव दिखें तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
अधिकांश लोग हॉट फ्लैश को केवल मेनोपॉज से जोड़ते हैं, जबकि इसकी शुरुआत पेरीमेनोपॉज में भी हो सकती है। हॉट फ्लैश के दौरान अचानक चेहरे, गर्दन और शरीर के ऊपरी हिस्से में तेज गर्मी महसूस होती है। इसके साथ पसीना आना, त्वचा का लाल होना और धबराहट भी हो सकती है।
हार्मोनल बदलाव मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसके कारण महिलाओं में चिड़चिड़ापन, चिंता, उदासी, भावनात्मक संवेदनशीलता और तनाव सहने की क्षमता में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। आम तौर पर इन लक्षणों को तनाव या हार्मोनल चेंजेज के तौर पर देखा जाता है।
पेरीमेनोपॉज के दौरान कई महिलाओं को अच्छी नींद नहीं आती। सोने में परेशानी होना, रात में बार-बार नींद खुलना, चिंता या नाइट स्वेट्स के कारण नींद प्रभावित होना जैसे लक्षण मेनोपॉज से पहले ही दिखाई देने लगते हैं। नींद पूरी न होने से थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई और दिनभर सुस्ती महसूस हो सकती है।
इस दौरान कई महिलाओं को मानसिक रूप से पहले की तुलना में धीमापन महसूस होता है। जिसकी वदह से ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, भूलने की आदत बढ़ना, सही शब्द याद करने में कठिनाई और फोकस में कमी हो सकती है। ये लक्षण आमतौर पर हार्मोनल बदलाव और नींद की कमी से जुड़े होते हैं।
मिडल एज में बढ़ते वजन के लिए केवल खानपान या शारीरिक गतिविधि ही जिम्मेदार नहीं होती। हार्मोनल बदलाव भी मेटाबॉलिज्म और शरीर में फैट जमा होने के तरीके को बदल सकते हैं। महिलाओं के पेट के आसपास चर्बी बढ़ना, मांसपेशियों की मजबूती कम होना और पहले जैसा वजन बनाए रखने में कठिनाई होती है। ऐसे में संतुलित आहार और नियमित व्यायाम की महत्वता बढ़ जाती है।
एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से महिलाओं की इंटिमेट हेल्थ भी प्रभावित हो सकती है, जैसे- योनि में सूखापन, संबंध बनाने के दौरान दर्द या असहजता महसूस होना, यौन इच्छा में कमी, बार-बार पेशाब आना या जलन महसूस होना। कई महिलाएं झिझक के कारण इन समस्याओं के बारे में बात नहीं करतीं, जबकि इनके प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं।
बता दें कि पेरीमेनोपॉज कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में होने वाला एक बदलाव है। लेकिन यदि इसके लक्षण आपकी नींद, मानसिक स्वास्थ्य, रोजमर्रा की गतिविधियों या रिश्तों को प्रभावित करने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।